क्या रनिंग करने से हिप और घुटनों में हो जाता है ऑस्टियोआर्थराइटिस? क्यों न्यू रनर को किया जाता है मना, जानें एक्सपर्ट की राय



Does Running increase the risk of osteoarthritis: ऑस्टियोआर्थराइटिस बेहद पेनफुल बीमारी है जो हाथ, हिप्स और घुटनों में होता है. यह ज्वाइंट या जोड़ों की बीमारी है. इसे वीयर एंड टीयर आर्थराइटिस भी कहा जाता हैं. इस बीमारी में जोड़ों के बीच में मौजूद कार्टिलेज टूटने या फटने लगते हैं. इसके टूटने से अंदर की हड्डियों में बदलाव होने लगता है जो समय के साथ बेहद खतरनाक साबित होने लगता है. इसमें सूजन, स्टीफनेस और बेपनाह दर्द होता है जो धीरे-धीरे और दर्दनाक होता जाता है. कुछ लोगों में यह धारणाएं रहती हैं कि रनिंग यानी दौड़ने से हिप्स और घुटनों में ऑस्टियोआर्थराइटिस का खतरा बढ़ जाता है. इस मामले में सही जानकारी क्या है. इसके लिए एक्सपर्ट ने रनिंग से ऑस्टियोआर्थराइटिस के खतरे के बारे में बताया है.

21 किलोमीटर से 42 किलोमीटर तक की रनिंग फायदेमंद
सोशल मीडिया पर अपोलो अस्पताल, हैदराबाद में न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर कुमार कहते हैं कि रनिंग फिटनेस को मैंटेन रखने के शानदार टूल है लेकिन रनिंग से न्यूकमर और लोगों में इंज्यूरी को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है. इस विषय को हमने आज डिकोड करने की कोशिश की. डॉ. सुधीर कुमार ने बताया कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या रनिंग करने से हिप्स और घुटनों में ऑस्टियोआर्थराइटिस का खतरा बढ़ जाता है. जो लोग नए-नए दौड़ना शुरू करते हैं, उनके मन में यह सवाल जरूर रहता है. डॉ. सुधीर कुमार ने बताया कि इस विषय को लेकर 25 से ज्यादा रिसर्च हुई है.

वैसे आमतौर पर रनिंग करने से हिप्स और घुटनों में सूजन नहीं होती है. रनिंग से तो घुटनों और हिप्स के डैमेज होने से रक्षा होती है. इसलिए जो लोग नियमित रूप से रनिंग करते हैं उनमें न्यूकमर की तुलना में ऑस्टियोआर्थराइटिस का खतरा बहुत कम होता है. अगर सप्ताह में 21 किलोमीटर से 42 किलोमीटर तक दौड़ लगाया जाए तो इससे हिप्स और घुटनों में ऑस्टियोआर्थराइटिस का खतरा नहीं होता है. लेकिन इससे ज्यादा यानी अगर सप्ताह 92 किलोमीटर तक रनिंग करते हैं तो थोड़ा बहुत खतरा हो सकता है.

मॉडरेट रनिंग से नुकसान नहीं
जर्नल ऑफ ऑर्थोपेडिक्स एंड स्पोट् र्स फिजिकल थेरेपी के अध्ययन के गवाले से बताया गया है कि यदि कम समय के लिए मॉडरेट रनिंग करते हैं यानी सप्ताह में 20-25 किलोमीटर तक दौड़ लगाते हैं तो इससे कूल्हे और जोड़ों में कार्टिलेज और मजबूत होता है. इससे कोई खास खतरा नहीं है लेकिन इससे ज्यादा की रनिंग या बहुत दिनों तक रनिंग इंज्यूरी के जोखिम को बढ़ा सकती है. एक अध्ययन में पाया गया कि जो लोग मनोरंजन के तौर पर रनिंग करते हैं, उनमें हिप्स और घुटनों में ऑस्टियोआर्थराइटिस का जोखिम 3.5 प्रतिशत होता है जबकि जो लोग ज्यादा दौड़ते हैं उनमें ऑस्टियोआर्थराइटिस का जोखिम 13.3 प्रतिशत और न्यूकमर रनर्स में इसका खतरा 10.2 प्रतिशत तक रहता है. एक्सपर्ट के मुताबिक रनिंग आमतौर पर ओवरऑल हेल्थ के लिए बेहद फायदेमंद है लेकिन इसमें इंज्यूरी का खतरा भी रहता है. इसलिए रनिंग का अभ्यास जरूरी है. पहले धीरे-धीरे इसकी शुरुआत करनी चाहिए और बहुत ज्यादा रनिंग नहीं करनी चाहिए. इसके साथ ही गलत पॉश्चर और गलत तरीका भी हिप्स और घुटनों में इंज्यूरी के जोखिम को बढ़ा सकता है.

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Author: Jagran Times

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