The central museum holds glorious history but still very few people come to see it. – News18 हिंदी

मेघा उपाध्याय/इंदौर. मध्यप्रदेश का बहुचर्चित केंद्रीय संग्रहालय एक बेहद ही खूबसूरत पर्यटन स्थलों में से एक है. यह सेंट्रल म्यूजियम इंदौर और उसकी इतिहास की गाथा बताता है, साथ ही कैसे इंदौर ने विकास की ओर अपना रुख किया उसके बारे में भी जानकारी देता है. यहां जाने पर पता चलता है कि कैसे एक ऐतिहासिक जगह इतने बड़े महानगर में तब्दील हो गई इसकी पूरी कहानी हमें सेंट्रल म्यूजियम में देखने को मिलती है.

संग्रहालय में मौजूद जैन वैष्णव और शिव प्रतिमा आकर्षण का केंद्र हैं. इसके साथ- साथ यहां परमार वंश की भी प्रतिमाएं देखने को मिलती है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी की इतना भव्य और गौरवशाली इतिहास जिस जगह पर संजोकर रखा गया है वहां पर्यटकों की संख्या अक्सर नाम मात्र ही होती है, यहां की टिकट मात्र 20 रुपए है और 15 वर्ष से कम की आयु के बच्चे बिना टिकट के एंट्री ले सकते हैं.

लोगों की संख्या बहुत कम होती जा रही है
गौरवशाली इतिहास के बावजूद मुश्किल से दिन भर में 5 से 10 टिकट की बिक्री हो रही है, जिसमें बाहर से आए लोगों की ही संख्या होती है. यहां के केयर टेकर और इतिहासकार जय प्रकाश मणि त्रिपाठी ने बताया कि अक्सर यहां पर वही लोग आते हैं, जिन्हें इतिहास के बारे में खास जानकारी होती है और उससे जुड़ी बातें समझने में रूचि होती है, लेकिन अफसोस ऐसे लोगों की संख्या बहुत कम है.

मूर्ति और चित्र बताते हैं इंदौर का इतिहास
इंदौर के केंद्रीय संग्रहालय की स्थापना साल 1923 में होलकरों द्वारा की गई थी जिसका मुख्य उद्देश्य इंदौर से जुड़े इतिहास को संजो कर रखना था. हालांकि, यहां की सभी मूर्तियां खंडित हैं, लेकिन आज भी वे हमारा स्वर्णिम इतिहास बयां करती है. यहां पर मंदसौर और हिलाज़गढ़ से इकट्ठे किए गए पत्थर और साथ ही साथ ऐतिहासिक हथियार भी मौजूद है जो बेहद ही आकर्षित है. स्कूल जाने वाले छात्रों के साथ-साथ इतिहास की जानकारी जुटाने वाले युवाओं के लिए यह बहुत ही अच्छा स्थल है जो इंदौर और इंदौर से जुड़ी जानकारियां आपको मूर्ति और चित्रों के जरिए बता सकता है.

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Author: Jagran Times

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