Bal Utasv 2023: मन्नू भंडारी, काशीनाथ सिंह और निर्देश निधि की कहानियों का मंचन


हिंदी अकादमी, दिल्ली द्वारा आयोजित बाल रंग महोत्सव में बाल कलाकारों की अद्भुत प्रतिभा देखने को मिल रही है. एक महीने की बाल रंगमंच कार्यशाला में तैयार हुए नाटकों का अब मंचन किया जा रहा है. इस कड़ी में दिल्ली के विभिन्न स्कूलों में वरिष्ठ लेखक मन्नू भंडारी, काशीनाथ सिंह और निर्देश निधि की कहानियों का मंचन किया गया.

शक्तिनगर स्थित सर्वोदय सह-शिक्षा विद्यालय नंबर-एक में मन्नू भंडारी की कहानी ‘त्रिशंकु’ का नाट्य मंचन किया गया. प्रियंका शर्मा और मयंक पुंडिर के निर्देशन में बच्चों ने यह नाटक तैयार किया. कहानी यहां से शुरू होती है- “घर की चारदीवारी आदमी को सुरक्षा देती है पर साथ ही उसे एक सीमा में बांधती भी है. स्कूल-कॉलेज जहां व्यक्ति के मस्तिष्क का विकास करते हैं, वहीं नियम-कायदे और अनुशासन के नाम पर उसके व्यक्तित्व को कुंठित भी करते हैं- बात यह है बंधु हर बात का विरोध उसके भीतर ही रहता है.”

कहानी है आधुनिक विचारों को मां-बेटी की. कहानी में एक बेटी के मम्मी-पापा का प्रेम विवाह हुआ था. मां जानती थी कि इस विवाह के लिए उसने अपने पिता का कितना विरोध किया था. अब उसकी बेटी बड़ी हो रही है. पड़ोस में रहने वाले लड़के से उसका मेल-जोल बढ़ता है. हालांकि लड़की के माता-पिता आधुनिक विचारों वाले हैं और बेटी की दोस्ती को खुद ही बढ़ावा देते हैं, लेकिन यहां मोहल्लेवाले खलनायक की भूमिका में आते हैं और बेटी के खिलाफ माता-पिता के कान भरने शुरू कर देते हैं. नाटक में दो विचारधार में झूलती मां के असमंजस को बड़े ही शानदार तरीके से दिखाया गया है.

बच्चों के अभिनय की तारीफ करनी होगी. सभी कलाकारों ने संवाद, एक्टिंग और नृत्य के स्तर पर खुद को बेहतर साबित किया. नाटक को रोचक बनाने के लिए कई स्थानों पर पुराने गानों का इस्तेमाल करके उसे और आकर्षक बनाया गया. मंच सज्जा और ध्वनि-प्रकाश के हिसाब से भी नाटक उम्दा ही साबित हुआ. ,

नाटक का सबसे अच्छा पहलू था इसका समापन. निर्देशक ने मंचन कर रहे सभी बच्चों के माता-पिता को भी नाटक के सूत्र में पिरोकर मंच पर बुलाया. यह एक ऐसा पल था जिसमें अभिभावकों की आंखें नम हो गईं.

दो अन्य नाटक ‘अपना रास्ता लो बाबा’ और ‘शेष विहार’ का मंचन दीनदयाल मार्ग पर स्थित सर्वोदय बाल विद्यालय, राउज एवेन्यू में किया गया. इस कहानी में युवा पीढ़ी द्वारा बुजुर्गों की अनदेखी को दिखाया गया है. एक बूढ़ा व्यक्ति शहर में रह रहे अपने अधिकारी भतीजे को खोजता हुआ आता है ताकि शहर में उसका ठीक से इलाज हो सके. कहानी कई मार्मिक मोड़ों से गुजरती हुई बुजुर्गों के महत्व के संदेश के साथ समाप्त होती है.

‘अपना रास्ता लो बाबा’ प्रसिद्ध कथाकार काशीनाथ सिंह की कहानी है. इस कहानी का नाट्य रूपांतर तैयार किया था प्रसून नारायण श्रीवास्तव और नेहा ने.

‘शेष विहार’ निर्देश निधि की कहानी है. इस कहानी को नाटक में बदला था गौरव शर्मा और अविनाश तिवारी ने. ‘शेष विहार’ भविष्य की कहानी है. कहानी में दिखाया गया है कि इनसानों द्वारा कुदरत के बेहिसाब दोहन से पृथ्वी अब एक ऐसे स्थान बंजर स्थान में तब्दील हो चुकी है जहां ना तो पानी है, ना ऑक्सीजन और ना ही कोई पेड़-पौधा या पशु-पक्षी. लोग विशेष कवच वाले मकानों में रहते हैं ताकि सूर्य की किरणें उनपर ना पड़ें. क्योंकि ओजोन परत पूरी तरह से खत्म हो चुकी है. अब बच्चे मां की कोख में नहीं बल्कि लैब में पैदा होता हैं. बच्चों में विचार, संवेदनाएं चिप के माध्यम से डाली जाती हैं. लेकिन एक मां रिस्क उठाकर बच्चे को अपनी कोख से पैदा करती है.

लेखिका निर्देश निधि ‘शेष विहार’ को एक क्रूर कहानी करार देती हैं. वास्तव में यह इनसानों के क्रूर कृत्य की कहानी है, जिसका परिणाम भविष्य की पीढ़ियां भुगतेंगी.

नाटक में वैज्ञानिक तकनीकों का बड़ा ही अच्छा प्रदर्शन किया गया. बच्चों ने रोबोट की भूमिका निभाकर सभी का मन मोह लिया.

हिंदी अकादमी के सचिव संजय गर्ग ने बताया कि बाल रंग कार्यशाला का आयोजन एक दशक से भी ज्यादा समय से किया जा रहा है. इसमें दिल्ली के विभिन्न 13 स्कूलों में एक महीने की कार्यशाला का आयोजित की जाती है. एक निर्देशक और एक सहायक निर्देशक के नेतृत्व में बच्चे एक महीने तक अभिनय, नृत्य आदि का ज्ञान लेते हैं. इस दौरान हिंदी के चर्चित लेखक की किसी कहानी पर एक नाटक भी तैयार किया जाता है. फिर इन नाटकों का मंचन किया जाता है.

सचिव संजय गर्ग ने बताया कि अभी तक आईटीओ स्थित प्यारे भवन में पूरे सात दिन का एक बाल महोत्सव आयोजित करके नाटकों का मंचन किया जाता था, लेकिन इस बार नाटकों को दिल्ली के कोने-कोने में मंचित करने के निर्णय किया गया है ताकि हिंदी अकादमी का यह प्रयास ज्यादा से ज्यादा लोगों के मध्य पहुंचे.

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Author: Jagran Times

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