
शिवम सिंह/भागलपुर. बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर में अब एयरोपोनिकविधि द्वारा आलू की खेती का सफल प्रयोग किया. इस विधि द्वारा किसानों को 10 गुणा उत्पादक क्षमता और आमदनी में भी वृद्धि होगी. बीएयू सबौर में अब हवा में आलू के बीज को तैयार किया जा रहा है. इससे किसानों की फसल की उत्पादन क्षमता, आमदनी अधिक होगी.
क्या कहते हैं कृषि वैज्ञानिक
बता दें कि इस विधि द्वारा कम जमीन में आलू की खेती की जा सकती है. बता दें कि इसको लेकर बीएयू सबौर में प्रयोग सफल रहा. वही आपको बता दे इस रिसर्च टीम में हेड डॉ. रणधीर कुमार ने बताया कि इस विधि द्वारा खेती करने पर किसानों की आय दोगुनी हो जाएगी. वही पैदावार में भी वृद्धि होगी. वही इसको लेकर सरकार द्वारा मंजूरी दे दी गई है. वहीं किसानों के बीच प्रचार प्रसार को लेकर बीएयू में किसानों को लेकर कार्यक्रम का आयोजन भी कराया जाएगा.
एरोपोनिक फार्मिंग की विधि
एरोपोनिक तकनीक में आलू की लटकती हुई जड़ों के द्वारा उन्हें पोषण दिए जाते हैं. जिसके बाद उसमें मिट्टी और जमीन की जरूरत नहीं होती. विशेषज्ञ कहते हैं कि एरोपोनिक तकनीक से खेती करना किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रहा है. इससे किसान कम लागत और कम जगह में आलू की ज्यादा पैदावार हासिल कर सकते हैं. ज्यादा पैदावार होने की स्थिति में किसानों की आमदनी में भी इजाफा होगा.
बिहार के भागलपुर जिले के बीएयू सबौर के वैज्ञानिक डॉ. रणधीर कुमार के मुताबिक आलू के बीज के उत्पादन की क्षमता को कई गुणा तक बढ़ाया जा सकता है. इस तकनीक से सिर्फ़ बिहार ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों के किसानों को भी लाभ पहुंचेगा.
अन्य सब्जियों की भी हो सकती है खेती
इसका उपयोग पत्तेदार साग, स्ट्रॉबेरी, खीरे, टमाटर और जड़ी-बूटियों के उत्पादन के लिए किया जा रहा है. किसानों के बीच एरोपोनिक फार्मिंग को प्रोत्साहित किया जा सके इसके लिए बिहार के भागलपुर जिले के बीएयू सबौर के द्वारा किसानों को इस तकनीक के बारे में बताने के लिए ट्रेनिंग प्रोगाम भी आयोजित किया जाएगा.
हवा में आलू का बीज को किया जाता है तैयार
बता दें कि एयरोपोनिक विधि द्वारा बिना मिट्टी के ही हवा में आलू का बीज को तैयार किया जा रहा है. बीएयू सबौर के वैज्ञानिक डॉ.रणधीर ने बताया कि भविष्य में आलू के किसानों के लिए आलू के बीज तैयार करने का लाभदायक विधि है इसमें संक्रमण मुक्त हो सकता है. बता दें कि परंपरागत खेती करने वाले किसानों को इस विधि द्वारा अधिक फायदा होगा.
वहीं एयरोपोनिक्स विधि द्वारा हवा में आलू गाने की विधि इस विधि से आलू की खेती और उसके बीज के उत्पादन में बढ़ोतरी की जा सकती है यह ज्यादा फायदेमंद है. इस विधि में आलू में बीमारियां व कीट भी कम लगते हैं. इससे गुणवत्ता भी अधिक होती है. इस तकनीक का प्रयोग करके किसान अच्छी गुणवत्ता वाले आलू का बीज तैयार कर सकते हैं. आलू के बीज दूसरे किसानों को बेचकर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.
एयरोपोनिक तकनीक से कैसे होती है खेती
इस तकनीक में शुरुआत में लैब से आलू हार्डनिग यूनिट तक पहुंचाया जाता है. उसके बाद पौधे की जड़ों को बावस्टीन में डुबोया जाता है. जिसके जिससे कि आलू के पौधों में फंगस नहीं लगता है. इसके बाद बेड बनाकर उससे कॉकपिट में इन पौधों को लगा दिया जाता है. इसके तकरीबन 10 से 15 दिन के बाद इन पौधों को एयरोपोनिक यूनिट के अंदर लगा दिया जाता है. आपको बता दें कि इस तकनीक के जरिए आलू की संख्या और गुणवत्ता दोनों ही बेहतर होती है.
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FIRST PUBLISHED : June 15, 2023, 23:24 IST






