कभी देखा नहीं होगी मधुमक्खी पालन की यह तकनीक, बड़े से बड़े ब्रांड भी नहीं दे सकते इस जंगल वाले हनी को टक्कर

आशीष कुमार/पश्चिम चम्पारण. आप चाहें किसी भी ब्रांड का शहद खा लें, मन में हमेशा यह शंका बैठी ही रहती है कि काश कहीं से एक नंबर शहद मिल जाए ! इस शंका की वजह से वास्तविक और पूरी तरह से प्राकृतिक शहद की तलाश कभी खत्म नहीं होती. कहीं न कहीं यह शंका सही भी है, क्योंकि आज की तारीख में शायद ही कहीं उस प्रकार की शहद मिलती है, जो पूरी तरह से कैमिकल फ्री और प्राकृतिक हो. लेकिन चिंता मत कीजिए क्योंकि अब आपकी यह तलाश खत्म होने वाली है.

दरअसल, आज हम आपको जंगलों में मधुमक्खी पालन तथा उससे निकाली गई एक नंबर, पूरी तरह से प्राकृतिक और कैमिकल फ्री शहद के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे अब आसानी से खरीदा जा सकता है.

मधुमक्खी पालन की खास प्रक्रिया
अब तक आपने पेड़ों पर या अन्य ऊंची जगहों पर मधुमक्खी के छत्ते को देखा होगा,जिनसे शहद को निकाला जाता है. इस प्रक्रिया से शहद तो निकल जाता है, लेकिन अनगिनत मधुमक्खियों सहित उनके अंडे बर्बाद हो जाते हैं. इसके अलावाइनमें अलग-अलग फलों या फूलों का स्वाद भी नहीं मिल पाता है, क्योंकि इस प्रक्रिया में मधुमक्खियां अपनी इच्छा से अलग-अलग फलों या फूलों पर बैठती हैं.

आपके शहर से (पश्चिमी चंपारण)

पश्चिमी चंपारण

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ऐसे में EDC की तरफ से मधुमक्खी पालन की एक खास प्रक्रिया अपनाई गई है, जिसमें मधुमक्खियों को तकरीबन 2 फीट चौड़े बॉक्स में लगे एक वैक्स फ्रेम के ऊपर पाला जाता है. इस डब्बे में कुल 4 फ्रेम लगे रहते हैं. एक फ्रेम पर मधुमक्खियां इकट्ठा होती हैं और शहद को इकट्ठा करती हैं. खास बात यह है कि हर एक डब्बे में एक रानी मधुमक्खी होती है, जो सभी को गाइड करती है.

जंगलों में किया जा रहा है मधुमक्खी पालन
जिस प्रकार पेड़ों पर छत्ता लगा रहता है, ठीक उसी प्रकार यहां बॉक्स में छत्ता रहता है. इन बॉक्स को जंगल के किनारे लीची, सरसों, जामुन या अन्य किसी भी फलों या फूलों के बागीचे के समीप रखते हैं. जब बॉक्स में मौजूद चारों वैक्स फ्रेम मधुमक्खियों से भर जाता है, तब उनमें दो और फ्रेम डाल दिया जाता है. उसके भरने के बाद उन दोनों फ्रेम को निकालकर अन्य बॉक्स में डाला जाता है.

इस प्रकार यह प्रक्रिया चलती रहती है. खास बात यह है कि जिस बागीचे के समीप बॉक्से रखे जाते हैं, शहद भी उसी फल या फूल के स्वाद का होता है. सरैयामन के प्रभारी डीएफओ प्रद्युम्न गौरव ने बताया कि वाल्मीकि टाइगर रिजर्व तथा सरैयामन पक्षी विहार में नवंबर 2022 से मधुमक्खी पालन किया जा रहा है. फिलहाल सरैयामन में 140 तथा वीटीआर में 50 बॉक्स है.

चम्पा अरण्य नाम से बिक रहा वीटीआर का शुद्ध शहद
मधुमक्खी पालन में प्रशिक्षण देने वाले ट्रेनर शुभम ने बताया कि वीटीआर तथा सरैयामन से निकाले गए शहद को चम्पा अरण्य नाम दिया गया है. खास बात यह है कि यह जंगल में पालन किए जा रहे मधुमक्खियों का बिलकुल शुद्ध शहद है. इसे निकलने के लिए एक्सट्रैक्टर जंगल में भी लगा है. फ्रेम को बॉक्स से निकालने के बाद एक्सट्रैक्टर की मदद से शहद को निकाला जाता है.

उसके बाद माइक्रोन के कपड़े से उसे पारंपरिक तरीके से ही फिल्टर किया जाता है. इसकी कीमत एक हजार रुपए प्रति केजी है. पैकेजिंग तथा न्यूट्रिएंट्स वैल्यू के लिए EDC ने पूसा की मदद ली है. आप इस शहद को वीटीआर स्थित दुकान तथा घर संसार से ले सकते हैं.

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Author: Jagran Times

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