जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी, ने कहा ,अब ये नन्हें हाथ कलम पकड़ेंगे, मिट्टी के चाक नहीं

 

कौशाम्बी-  जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी ने ओसा से कलेक्ट्रेट लौटते समय पाता गांव के पास सड़क किनारे मिट्टी के बर्तन बनाती नन्हीं बच्चियों को देखते ही जिलाधिकारी ने फ़ौरन अपनी सरकारी गाड़ी रुकवायी और बच्चियों के पास पहुँच गए। मिट्टी से सने छोटे-छोटे हाथों में जब
जिलाधिकारी ने भविष्य की चमक देखी तो उन्होंने उन बच्चियों से स्नेहपूर्वक बातचीत की। उन्होंने पूछा कि पढ़ाई करती हो बेटा? जवाब में झिझक और मासूम मुस्कान देखकर जिलाधिकारी ने उनके अभिभावकों से कहा, अब ये हाथ चाक नहीं, किताब और कलम थामेंगे,इन्हें मिट्टी में नहीं, शिक्षा में अपना भविष्य गढ़ने दो,जिलाधिकारी ने मौके पर मौजूद उप जिलाधिकारी मंझनपुर, सुखलाल प्रसाद वर्मा को निर्देश दिया कि इन बच्चियों का तत्काल प्रवेश कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, मंझनपुर या राजकीय आश्रम पद्धति बालिका विद्यालय, भरसवा में सुनिश्चित कराया जाए, ताकि कोई भी बच्ची शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहे। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रशासन का असली उद्देश्य तभी सार्थक है जब समाज के अंतिम पायदान पर खड़ी बच्ची भी अपने सपनों को उड़ान दे सके।
जिलाधिकारी की इस पहल से ग्रामीणों में प्रसन्नता की लहर दौड़ गई। वहां मौजूद लोगों ने कहा कि डीएम साहब ने जो किया, वो किसी अधिकारी का नहीं, एक पिता का भाव था। इस मानवीय पहल ने न सिर्फ बच्चियों के चेहरे पर मुस्कान लाई, बल्कि यह संदेश भी दिया कि जब संवेदना सत्ता से मिलती है, तब परिवर्तन अवश्य होता है।

 

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Author: Up Head Line

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