सेबी के आदेश के खिलाफ जी एंटरनेटमेंट ने रखा अपना पक्ष, कहा- यह अन्याय है, जवाब देने का मौका तक नहीं मिला

हाइलाइट्स

सेबी ने 200 करोड़ रुपये की हेराफेरी का लगाया है आरोप.
नियामक का कहना है कि कंपनी का पैसा कहीं और ट्रांसफर हुआ.
कंपनी में दोनों के शेयर बहुत होने के बावजूद वे निदेशक मंडल में रहे.

नई दिल्ली. जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (ज़ी) के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (एमडी और सीईओ) पुनीत गोयनका के कानूनी प्रतिनिधियों ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के अंतरिम आदेश को “अनुचित और अन्यायपूर्ण” करार दिया है. उन्होंने प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (सैट या SAT) के सामने तर्क दिया कि सेबी ने बिना पक्ष सुने ही फैसला सुना दिया. गोयनका की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जनक द्वारकादास ने कहा कि सेबी दो दिनों में केवल बैंक स्टेटमेंट के आधार पर निष्कर्ष पर पहुंच गया.

उन्होंने कहा कि कथित तौर पर 200 करोड़ रुपये की हेराफेरी का मामला चार साल में सेबी द्वारा निपटाया नहीं गया था, लेकिन अचानक केवल शुरुआती जांच के आधार पर आदेश जारी कर दिया गया. जी ने यह भी कहा है कि जिस ट्रांजेक्शन पर सवाल उठाए जा रहे हैं यह 2019 का है और इस पर सफाई पहले ही शेयर बाजार और सेबी को दी जा चुकी है. वकील ने दलील दी कि जी के प्रमोटर्स को जवाब देने या सुनवाई के लिए एक दिन का भी अवसर नहीं दिया गया. जी ने 18 जून को सेबी को लिखे एक पत्र में यह भी कहा है कि बार-बार जांच के आदेश दिए जाने से सोनी के साथ चल रही मर्जर की बात खतरे में पड़ सकती है.

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26 जून को सुनवाई
सैट अब इस मामले पर 26 जून को सुनवाई करेगा. ज़ी और सोनी पिक्चर्स नेटवर्क इंडिया के विलय पर नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में भी इसी दिन सुनवाई होनी है. कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि एनसीएलटी की सुनवाई और टल सकती है. गौरतलब है कि 16 जून को सैट ने एस्सेल समूह के चेयरमैन सुभाष चंद्रा और उनके बेटे पुनीत गोयनका को सेबी के आदेश के खिलाफ कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था.

क्या था सेबी का आदेश
सेबी ने बीते सोमवार को चंद्रा और समूह की कंपनी जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (जेडईईएल) के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी पुनीत गोयनका पर किसी भी सूचीबद्ध कंपनी में निदेशक या किसी प्रमुख प्रबंधकीय पद लेने की रोक लगा दी थी. बाजार नियामक ने चंद्रा और गोयनका पर यह कार्रवाई जेडईईएल के पैसे दूसरी जगह भेजने के मामले में दोषी पाए जाने के बाद की थी.

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Author: Jagran Times

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