इन गाने की 1 लाइन पर हुआ था बवाल, डायरेक्टर की उड़ गई थी नींद, ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी फिल्म

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नई दिल्ली. फिल्मों की कहानी, डायलॉग्स, वेशभूषा और गानों सहित कई अन्य चीजों के लिए विरोध होता रहा है. कभी लोगों ने फिल्म का कहानी पर वबाल खड़ा किया तो कभी फिल्म में पहने कपड़ों को लेकर. हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘आदिपुरुष’ के डायलॉग्स को लेकर बखेड़ा खड़ा हुआ है. फिल्म में हनुमान के मुख से जो डायलॉग्स ने सीधे लोगों के सीने पर ऐसे वार किया और फिर हर तरफ से एक जैसे रिएक्शन. मामाल लोगों की भावना से जुड़ा था, तो मेकर्स ने भी गलती का मान ही लिया, लेकिन क्या आप 45 साल पहले एक गाने पर खड़े हुए बखेड़े के बारे में जानते हैं?

45 साल पहले बॉलीवुड के 5 बड़े नाम, इस फिल्म में थे. फिल्म को मनमोहन देसाई बना रहे थे. लेकिन इसके एक गाने को लेकर ऐसा बखेड़ा हुआ कि कई महिला संगठनों को आपत्ति जताते हुए विरोध जताया था, क्या आप फिल्म का नाम गैस कर पाए. अगर नहीं तो आपको बताते हैं कि उस गाने को लेकर क्यों बवाल हुआ था.

‘धरम वीर’ का म्यूजिक एल्बम रिलीज ही शुरू हुआ था बवाल
वो साल था 1977 का, जब धर्मेंद्र, जितेंद्र, जीनत अमान, नीतू सिंह और प्राण की फिल्म ‘धरम वीर’ रिलीज हुई थी. फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई, सभी का प्रदर्शन लोगों को जोरदार लगा था, लेकिन फिल्म के एक गाने ने मेकर्स की सांसों को फुला दिया था. दरअसल, फिल्म ‘धरम वीर’ का म्यूजिक एल्बम रिलीज होने के कुछ दिनों बाद महिला संगठनों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया.

आनंद बक्शी ने लिखे थे गाने के बोल
फिल्म का म्यूजिक एल्बम रिलीज हुआ को वो हुआ, जिसकी उम्मीद न तो गीतकार आनंद बख्शी ने की थी और न ही मनमोहन देसाई ने. गाना को सुनने के बाद महिलाओं का गुस्सा सातवें आसमान पर था. दरअसल, फिल्म में एक गाना था, जिसके बोल है ‘सात अजूबे इस दुनिया में’. इस गाने का मुखड़ा और पहला अंतरा तो ठीक था, लेकिन दूसरे अंतरे में आनंद बक्शी ने कुछ ऐसा लिख दिया, जिसके बाद सारा बवाल शुरू हुआ.

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गाने के किस बोल पर हुआ था बवाल
गाने के दूसरे अंतरे में आनंद बक्शी ने लिख ने दिया था, ‘ये लड़की है या रेशम की डोर है. कितना गुस्सा है, कितनी मुंह जोर है. ढीला छोड़ न देना हंसके, रखना दोस्त लगामें कसके. मुश्किल से काबू में आए लड़की हो या घोड़ी…’ इसी लाइन लड़की हो या घोड़ी… को लेकर जमकर विवाद हुआ था. महिलाओं के लिए ये लाइन अपने आप में ही अपमानजनक है और इसलिए विरोध महिलाओं की तरफ से ही हुआ. विवाद बढ़ता गया तो मनमोहन के साथ धर्मेंद्र भी घबराए हुए थे, क्योंकि उन्हें अपनी इस फिल्म से बहुत उम्मीदें थी.

विरोध बढ़ा तो, बदली गाने की लाइन
विरोध बढ़ता हुआ देखकर डायरेक्टर मनमोहन देसाई ने आनंद बक्शी से कहकर दूसरी लाइन लिखवाई और फिर से रिकॉर्ड और रिलीज किया था. इस गाने को धर्मेंद्र-जीनत, जितेंद्र नीतू सिंह पर फिल्माया गया था. गाने के लिए आवाज मोहम्मद रफी और मुकेश ने दी थी. फिल्म रिलीज हुई और ब्लॉकबस्टर साबित हुई.

Tags: Dharmendra, Entertainment Special, Jeetendra

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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