
अमित सिंह, प्रयागराज: सोमवार से ही गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ हो चुका है. आज यानी मंगलवार को दूसरे दिन मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ लगी हुई है. आज के दिन का एक अपना महत्व है. इस दिन मां ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा की जाती है.ऐसी मान्यता है कि जो भी व्यक्ति मां ब्रह्मचारिणी की पूजा श्रद्धा रूपेण करते हैं, उसे मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है.
खास बात यह है कि यह दो शब्द ब्रह्म अर्थात तप और चारणी अर्थात आचरण से मिलकर बना है. इसका मतलब यह है कि मां ब्रह्मचारणी तप करने वाली देवी है. गुप्त नवरात्रि में साधक कठिन पूजा, जप और तप कर उन्हें प्रसन्न करते हैं, जिससे उन्हें मनचाहे वर की प्राप्ति होती है.
शक्ति का स्वरूप हैं मां ब्रह्मचारिणी
गुप्त नवरात्रि में दूसरे दिन प्रयागराज स्थित मा आलोप शंकरी की पूजन भोर से ही प्रारंभ हो गया था. आचार्य लक्ष्मी कांत शास्त्री ने बताया कि देवी ब्रह्मचारिणी तप की शक्ति का प्रतीक हैं.इनकी आराधना से भक्त की तप करने की शक्ति बढ़ती है. साथ ही सोचे गए सभी काम पूरा करने के लिए प्रेरणा मिलती है.
मां की ममता का अलौकिक स्वरूप
मां ब्रह्मचारिणी के मुखमंडल पर कांतिमय आभा झलकती है, जो मां की ममता का अलौकिक स्वरूप है. जहां मां अपने दाहिने हाथ में माला और बाएं हाथ में कमंडल धारण की हैं.इन्हें विद्या की देवी और वैरागी भी कहा जाता है. ब्रह्म बेला में ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से घर में समृद्धि और शक्ति का प्रवेश होता है.ओम देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः का उच्चारण जरूर होना चाहिए.
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FIRST PUBLISHED : June 20, 2023, 10:47 IST






