
नरेश पारीक/चूरू. पिता छोटे से परिदों का बड़ा आसमान हैं. ऐसा आसमान, जिस पर बच्चे बेखौफ होकर खुलकर कामयाबी की उड़ान भर सकते हैं. फादर्स डे पर मिलवाते है एक ऐसे ही पिता से जिनके संघर्षों ने बच्चों के बेहतर भविष्य की नींव रखी. ऐसे तो हर एक पिता के संघर्ष की एक अलग कहानी है. लेकिन, कुछ ऐसे भी हैं जिनके संघर्ष के किस्सों को सुन आप उन्हें सलाम करेंगे.
चूरू के एमएल अली खान की जो स्वयं भले ही 5वीं तक पढ़े लिखे हों. लेकिन, अपना पसीना इस कदर बहाया कि उनके पसीने की गिरी एक-एक बूंद ने उनके बच्चों को सींचा और इस कदर सींचा की आज पसीने की बूंद से तैयार वो पौधा एक वटवृक्ष बन गया.
पिता की बदौलत ही सब कुछ हूं
मेडिकल कॉलेज चूरू के सीनियर फिजिशियन मेडिसिन के एसोसियेट प्रोफेसर डॉक्टर आरिफ खान बताते हैं कि आज वह जो कुछ भी है अपने पिता की बदौलत हैं. जिन्होंने मेहनत, मजदूरी कर हमें इस काबिल बनाया. उन्होंने ने बताया कि परिवार में सरकारी नौकरी नहीं थी. पिताजी कास्तकारी करके, ऊंट गाड़ी से काम करके घर की आजीविका चलाते और हमारी शिक्षा के लिए भी पैसे जुटाते थे. उनकी मेहनत और संघर्ष देखकर इतनी शिद्दत से पढ़ाई की जिसका परिणाम आज सभी के सामने है.
ऊंट गाड़ी से मजदूरी करते थे
एमएल अली ने बताया कि पहले के दौर में आय के स्त्रोत सीमित थे. वह खुद 5वीं तक पढ़े लिखे थे और परिवार भी मेहनत मजदूरी करता था. अली बताते हैं कि वे ऊंट गाड़ी से मजदूरी करते और खेती, बाड़ी कर अपने परिवार का पालन, पोषण करते थे. लेकिन हमेशा यही सोचा की मेहनत कर बच्चों को काबिल बनाएंगे.
उन्होंने ने बताया कि उनके चार बच्चे थे. ऐसे में उनके सभी बच्चों ने शुरुआती शिक्षा गांव के ही स्कूल में ली और बच्चों को पढ़ता लिखता देख काफी सुकून मिलता था. आज उनकी मेहनत रंग लाई और उनके सभी चार बच्चों ने अच्छी तालीम हासिल की, आज डॉक्टर आरिफ़ मेडिकल कॉलेज चूरू के सीनियर फिजिशियन मेडिसिन के एसोसियेट प्रोफेसर हैं. वहीं अन्य बच्चे भी अच्छे पदों पर हैं.
.
Tags: Churu news, Father Day, Local18, Rajasthan news, Success Story
FIRST PUBLISHED : June 18, 2023, 12:27 IST






