क्या है दिशा शूल, भूलकर भी शुक्रवार और रविवार को ना करें इस दिशा की यात्रा, इन उपाय से करें बचाव

हाइलाइट्स

दिशा शूल हर दिन और हर दिशा का अलग होता है.
इसमें यात्रा करने की मनाही होती है.

What is Disha Shool : जब हम घर से किसी काम के लिए बाहर निकलते हैं तो उम्मीद होती है कि हमारा वह काम सफल होगा. जिसके लिए हम निकल रहे हैं. परंतु ज्योतिष शास्त्र में कुछ ऐसे अशुभ समय और दिशा के बारे में बताया गया है जिसमें यात्रा करने पर हमारे उस काम को सफलता प्राप्त नहीं होती या फिर हमें अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है. यह अशुभ दिशा और समय सप्ताह के सातों दिन पर निर्भर करता है. इस अशुभ समय को दिशाशूल भी कहा जाता है. आइए जानते हैं दिल्ली निवासी ज्योतिष आचार्य पंडित आलोक पाण्डया से क्या है दिशा शूल, इसका महत्व और बचाव.

क्या होता है दिशा शूल?

सप्ताह के सातों दिन अलग-अलग शूल बताए गए हैं. ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि कोई दिन या दिशा ऐसी होती है जिसमें यात्रा करना वर्जित होता है. इसे दिशा शूल के नाम से भी जाना जाता है. जरूरी नहीं कि हर बार दिशा शूल अशुभ ही हो. परंतु ज्यादातर दिशा शूल अशुभ होते हैं. ये सप्ताह के सातों दिन पर निर्भर करता है. इसमें मुख्य रूप से दक्षिण दिशा की यात्रा की मनाही होती है या फिर सावधानी पूर्वक इस दिशा में यात्रा करने की सलाह दी जाती है.

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इस दिन का रखें विशेष ध्यान

वैदिक ज्योतिष के अनुसार शुक्रवार और रविवार के दिन पश्चिम दिशा का दिशा शूल माना जाता है. साथ ही शुक्रवार और रविवार के दिन पश्चिम दिशा और दक्षिण-पश्चिम कोण में दिशा शूल माना जाता है. कोशिश करें इन दोनों दिन बताई गई दिशाओं में यात्रा करने से बचें.

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दिशा शूल से बचने के ज्योतिषी उपाय

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि आप शुक्रवार के दिन यात्रा करने वाले हैं तो दिशा शूल के उपाय के तौर पर घर से जौ या राई खाकर घर से बाहर निकलें. साथ ही इससे पहले पांच कदम पीछे चलें.
आपको रविवार के दिन यात्रा करना है तो दिशा शूल के उपाय के तौर पर आप घर से दलिया या फिर घी खाकर यात्रा के लिए जाएं.

Tags: Astrology, Dharma Aastha, Religion

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Author: Jagran Times

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