
पीयूष पाठक/अलवर. असफल होने पर भी कोशिश करने वालों की हार नहीं होती, जब तक वह खुद अपनी हार न मान ले. मन में लगन और मेहनत से की हुई कोशिश हर बार सफल हुई है. ऐसा ही एक कारनामा अलवर के देवेंद्र सिंह यादव ने किया. इस बार देवेंद्र का नीट में चौथा अटेंप्ट था. उन्होंने ऑल इंडिया में 4655 व ओबीसी वर्ग में 1571वी रैंक हासिल की है.
देवेंद्र अलवर जिले के रेनी क्षेत्र के गढ़ी सवाई राम गांव के निवासी हैं. देवेंद्र का नीट में चयन होने से गांव में भी खुशी का माहौल है. गांव वासियों का कहना है कि शहरों में तो डॉक्टर मिल जाते हैं. लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों से डॉक्टर कम ही निकलते हैं, इसलिए हमें खुशी है कि हमारे गांव का बेटा भी अब डॉक्टर बनेगा.
सेल्फ स्टडी पर फोकस किया
देवेंद्र ने बताया कि उन्होंने 2019 में 12वीं पास की तथा उसके बाद से ही नीट के एग्जाम देना शुरू किया. 9वीं क्लास से ही लक्ष्य बना लिया. पहले अटेम्प्ट में उन्हें लगा कि उनका एग्जाम क्लियर हो जाएगा, लेकिन किन्हीं कारणों से वह एग्जाम क्लियर नहीं हो पाया. देवेंद्र 1 साल कोटा में कोचिंग कर चुके हैं. उसके बाद उन्होंने सेल्फ स्टडी पर फोकस किया. लेकिन उन्हें समझ आ गया था कि सेल्फ स्टडी के साथ टेस्ट सीरीज में भी उन्हें महारत हासिल करनी होगी. उन्होंने अलवर के गुरु कृपा में टेस्ट सीरीज जॉइन की.
12 घंटे तक की पढ़ाई
देवेंद्र ने बताया कि उनका पढ़ाई का शेड्यूल करीब 12 घंटे का रहता था. वह सुबह जल्दी लाइब्रेरी जाते और शाम को घर आने के बाद करीब 12 बजे तक पढ़ाई को अंतिम रूप देते. अगली सुबह 4 बजे उठकर पढ़ाई करते और सुबह लाइब्रेरी के लिए निकल जाते. देवेंद्र ने बताया कि मेरे परिवार ने मेरा सपोर्ट किया. पिताजी अलवर के अरावली विहार थाने में कार्यरत हैं. उन्होंने मुझे पूरा सपोर्ट किया.
असफलता मिलने पर भी न हों निराश
देवेंद्र ने बताया कई बार बच्चे असफलता से निराश हो जाते हैं, लेकिन मैं सबको अपना उदाहरण दे कर बताना चाहता हूं कि असफलता से निराश नहीं होना चाहिए. अपने लक्ष्य को जिद बनाइए और उसके पीछे लग जाइए. आपको सफलता जरूर मिलेगी. मैंने भी तीन अटेम्प्ट दिए कहीं न कहीं मेरी भी हिम्मत टूटी. लेकिन मेरे सपोर्ट में मेरे पिता खड़े थे, जिससे मुझे हिम्मत मिली और आज मैं मुकाम पर पहुंच गया हूं.
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FIRST PUBLISHED : June 17, 2023, 21:03 IST






