‘आदिपुरुष’ में क्या रामायण की मूल भावना के साथ कोई छेड़छाड़ की गई है? मनोज मुंतशिर बोले- ‘थोड़ी सी…’

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नई दिल्ली: ‘आदिपुरुष’ (Adipurush) का कुछ महीनों पहले जब टीजर रिलीज हुआ था, तब इसे लेकर काफी विवाद हुआ था. भगवान राम और रावण को गलत तरीके से दिखाने की वजह से फिल्म मेकर्स की आलोचना हुई थी. फिल्म मेकर्स को तभी काफी सचेत हो जाना चाहिए था, पर ऐसा हुआ नहीं. अब रिलीज के बाद ‘आदिपुरुष’ पर काफी विवाद खड़ा हो गया है.

मनोज मुंतशिर ने ‘आजतक’ से हुई बातचीत में कहा, ‘ओम राउत का एक यूनिवर्स है. उन्होंने ‘रामायण’ की कहानी खास तरीके से सुनानी चाही. ‘रामायण’ जो वाल्मीकि ने लिखी और ‘रामायण’ जो तुलसीदास ने लिखी, दोनों में बड़ा अंतर है. आपको ऐसे अनगिनत प्रसंग मिलेंगे जो वाल्मीकि ‘रामायण’ में नहीं हैं, लेकिन तुलसीदास की ‘रामायण’ में है. केवट का जिक्र एक में है, दूसरे में नहीं. किसी में लक्ष्मण रेखा का जिक्र नहीं है. परशुराम और लक्ष्मण के संवाद का जिक्र एक में है, दूसरे में नहीं है.’

मनोज मुंतशिर ने दर्शकों से पूछे सवाल
मनोज आगे कहते हैं, ‘भगवान राम शबरी से मिले, पर उन्होंने झूठे बेर खाए, यह लोकोक्ति का हिस्सा बन गया. ‘रामायण’ की कहानी में बहुत कुछ जुड़ता, घटता-बढ़ता रहा है, हम कोई नई बात नहीं कर रहे हैं. जो हुआ है, सच्ची श्रद्धा के साथ हुआ है. अगर मैं दोषी हूं किसी का, तो एक सवाल खुद से पूछिए कि क्या ‘रामायण’ की मूल भावना के साथ छेड़छाड़ की गई? क्या भगवान श्रीराम को गलत और रावण को सही दिखा दिया? क्या बजरंगबली को ऐसा दिखा दिया, जैसा उन्हें नहीं दिखना था? क्या वे राम भक्त नहीं दिखे?’

तुलसीदास और क्रिएटिव लिबर्टी का किया जिक्र 
मनोज आखिर में कहते हैं, ‘क्या अंत में सत्य की असत्य पर जीत नहीं हुई? अगर हमने ऐसा नहीं दिखाया है, तो हम आपके अपराधी हैं और हम आपसे क्षमा मांग लेते हैं. अगर हमने यह दिखाया है, कैसे दिखाया है, किस क्रिएटिव लिबर्टी के साथ दिखाया है. आपने जो बाबा तुलसीदास को थोड़ी सी स्वतंत्रता दी, तो थोड़ी सी मुझे भी स्वायत्तता दें और समझें कि मनोज मुंतशिर ने इस कहानी को ऐसे देखा.’ बता दें कि कल 16 जून को रिलीज हुई ‘आदिपुरुष’ का ग्लोबल कलेक्शन पहले दिन 150 करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया है.

Tags: Adipurush, Manoj Muntashir

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Author: Up Head Line

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