
हिमांशु नारंग/करनाल. हरियाणा के युवाओं के बीच इन दिनों एक खतरनाक ट्रेंड चल रहा है, जो जानलेवा साबित हो रहा है. विदेशों में जाकर डॉलर कमाने के सपने देखकर हरियाणा के युवा न केवल लाखों रुपये खर्च कर रहे हैं, बल्कि जीवन की भी संघर्षों का सामना कर रहे हैं.पंजाब के बाद अब हरियाणा के युवाओं में विदेश जाकर जल्दी से पैसे कमाने का जुनून दिखाई दे रहा है. इसके पीछे कई मुख्य कारण हैं. हालांकि, यह बताना चाहेंगे कि बेरोज़गार युवा जो स्टडी वीजा या वर्क वीजा के बाद विदेश जाने का सपना पूरा नहीं कर पाते हैं, वे गैरकानूनी रास्ता चुनते हैं. इसमें लाखों रुपये खर्च होते हैं और कोई भी गारंटी नहीं होती कि विदेश तक पहुंचेंगे या नहीं.
कई मामलों में, यहाँ तक कि कई युवा बीच रास्ते में ही जान गंवा चुके हैं, जो यह साबित करता है कि ये खतरनाक है. कुछ ऐसे लोग हैं जो विदेशी जेलों में बंद हैं, और कुछ लोगों को डिपोर्ट कर दिया गया है. एजेंट काफी पैसे कमाते हैं, लेकिन ऐसे लोगों ने कई घरों को जला दिया है. परिजन अपनी जमीन गिरवी रखकर, बेचकर, या कर्ज लेकर अपने बच्चों को विदेश भेजते हैं. उम्मीद होती है कि वे किसी तरह विदेश पहुंचेंगे, वहां काम करेंगे, और डॉलर कमाएंगे, तो कुछ सालों में कर्ज़ भी चुकता हो जाएगा और जीवन सुधर जाएगा. बढ़ती बेरोज़गारी ने इन अवैध तरीकों को और तेजी दी है. यहाँ युवाओं के पास रोज़गार नहीं है और ना ही अच्छे भविष्य की आशा है, सिर्फ निराशा में लोग डोंकी की बाधा सह रहे हैं.
करनाल के 300 लोग गए है डोंकी से विदेश
जब भी डोंकी के रास्ते से विदेश जाने की बात होती है, तो करनाल का नाम ज़रूर उभरता है. जानकारों के मुताबिक, करनाल जिले के हर गांव से लगभग 20 युवा विदेश जा चुके हैं. करनाल के गगसिना गांव में सबसे ज्यादा युवा विदेश गए हैं. ग्रामीण लोग बताते हैं कि गांव में लगभग 300 युवा विदेश गए हैं, जिनमें से अधिकांश डोंकी के रास्ते से विदेश गए हैं. गांव के सभी युवा, बिना संदेह के, अपनी मंज़िल तक पहुंच गए हैं, लेकिन करनाल के अलावा कई और जिलों के युवा, अपनी मंज़िल पर पहुंचने से पहले ही अपनी ज़िंदगी को त्याग देते हैं. और ये सब डोंकी के रास्ते से विदेश जाने वाले युवाओं के साथ होता है
क्या होता है डोंकी
डोंकी रास्ते से विदेश जाना मतलब है गैरकानूनी तरीके से विदेश में जाना.इसके लिए 30 से 60 लाख रुपये तक खर्च हो जाते हैं. डोंकी रास्ते से विदेश जाना बहुत ज्यादा जोखिम भरा है. इसमें आप अपने घर से विदेश जाने के लिए निकल तो जाते हैं, लेकिन आपको मालूम नहीं होता कि आप विदेश कब पहुंचेंगे. विदेश पहुंचने में 10 दिन से एक महीने या फिर एक महीने से एक साल भी लग सकता है. और इसमें आपकी जान बीच रास्ते में भी जा सकती है. एजेंट के साथ आपकी बात फ्लाइट के ज़रिए जाने की तय होती है. लेकिन आधा सफर आपको पैदल चलकर, नदी पार करके बस के ज़रिए तय करना पड़ता है. रास्ते में खाना मिलना भी मुश्किल हो जाता है. ऊपर से मौसमी कीड़े, जंगली जानवरों के काटने का भी डर होता है. और इन सब के बाद अगर आप विदेश पहुंच भी जाते हैं तो विदेशी पुलिस के पकड़े जाने के बाद तय होता है कि आपको विदेश में शरण मिलेगी या नहीं.
हर साल दर्ज हो रहा मामला
करनाल एएसपी पुष्पा खत्री ने डोंकी रास्ते को लेकर कहा कि जब भी ऐसे केस उनके पास आते हैं .पुलिस तुरंत इस मामले में जांच कर आरोपियों के नेटवर्क तक पहुंचती है . एएसपी बताती हैं की पिछले 3 साल में डोंकी के रास्ते विदेश भेजने के नाम पर कई फ्रॉड केस सामने आए है. 2021 में 63 , 2022 में 101 वहीं 2023 में अब तक 47 विदेश भेजने के नाम पर फ्रॉड केस सामने आ चुके हैं . इन सभी मामलों में पुलिस की तफ्तीश जारी है.
रोज़गार की तलाश में विदेशों का रुख
वहीं विदेश जाने की कोशिश कर रहे युवाओं से लेकर गांव के बड़े-बुजुर्ग और वीजा एक्सपर्ट का यही कहना है की अधिकतर युवा रोज़गार की तलाश में विदेश जाते हैं । हालांकि कुछ का ये भी मानना है की जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है और ऐसे में बेरोज़गारी भी बढ़ेगी लेकिन कुछ लोगों का ये भी मानना है कि सरकार को भारत में ही युवाओं के लिए रोज़गार से जुड़े कुछ विकल्प तलाशने चाहिएं ताकि युवाओं को विदेशों में शरण न लेनी पड़े। कम से कम डोंकी जैस गैरकानूनी तरीके से तो बिल्कुल नहीं.
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FIRST PUBLISHED : June 17, 2023, 19:01 IST






