MP Assembly Elections : फिर चुनाव ड्यूटी में लगाए गए शिक्षक, स्कूल खुलने से पहले और बंद होने के बाद सर्वे

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भोपाल. मध्यप्रदेश में 4 साल बाद भी शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्य से मुक्त रखने कोई नीति तैयार नही हो सकी है. मई महीने से ही शिक्षक चुनावी कामकाज की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. सरकारी स्कूलों के शिक्षक चुनाव से पहले मतदाता सूची अपडेट करने, नए नाम जोड़ने के लिए घर घर सर्वे में जुटे हुए हैं. पंचायत चुनाव,नगरीय निकाय चुनाव, और विधानसभा चुनाव से पहले ही शिक्षकों को पढ़ाई के साथ चुनाव के काम करने की भी दोहरी जिम्मेदारी मिली है. स्कूल शिक्षा विभाग की तरफ से कहा गया था कि शिक्षकों को शिक्षा के अलावा अन्य दूसरे कामों से मुक्त रखा जाएगा. लेकिन अब तक शिक्षकों के लिए कोई नीति तैयार नहीं हो सकी है.

मध्यप्रदेश में नवंबर के महीने में विधानसभा चुनाव हैं. चुनाव से पहले एक बार और मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन होगा. उसमें पहली बार वोट डालने वाले युवाओं के नाम जोड़ने के साथ वोटर लिस्ट में नाम अपडेट कराने का अंतिम मौका दिया जा रहा है. इसे लेकर स्कूल शिक्षा विभाग के शिक्षक चुनावी कामकाज की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. पढ़ाई प्रभावित ना हो इसलिए शिक्षक सुबह स्कूल खुलने से पहले और स्कूल की छुट्टी होने के बाद घर-घर सर्वे कर रहे हैं. पंचायत चुनाव में भी शिक्षकों ने BLO की जिम्मेदारी संभाली थी. नगरीय निकाय और विधानसभा चुनाव में भी शिक्षक बीएलओ की ड्यूटी निभा रहे हैं. स्कूल खुलने के साथ ही छात्र-छात्राओं की पढ़ाई पर इसका असर देखने को मिलेगा. राजधानी भोपाल में 300 से ज्यादा शिक्षक चुनावी ड्यूटी में लगे हुए हैं. प्रदेश भर में हर जिले से 300 से ज्यादा शिक्षकों को चुनावी कामकाज की जिम्मेदारी दी गई है.

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शिक्षकों पर दूसरे काम का बोझ
शिक्षकों को हर चुनाव में बीएलओ की जिम्मेदारी देने पर कांग्रेस का कहना है टीचर्स को हर किसी काम में न लगाने की मांग कई बार उठ चुकी है. शिक्षकों को BLO  ड्यूटी में ना लगाएं क्योंकि स्कूल शुरू हो रहे हैं. शिक्षकों को BLO ड्यूटी से हटाएं. कोविड के बाद से अभी भी बच्चों की पढ़ाई में स्थिति संभली नहीं है. जो बच्चे निजी स्कूल में एडमिशन नहीं चाहते इसलिए गर्वमेंट स्कूल में ज्यादा से ज्यादा वेकैंसी क्रिएट की जाएं. इससे ज्यादा बच्चों का एडमिशन हो सके. मध्यमवर्गीय और गरीब बच्चों के परिवार के बच्चों के भविष्य को बेहतर करने की दिशा में शिक्षकों को चुनावी कामकाज से मुक्त रखना चाहिए.

ये हमारा नहीं-निर्वाचन आयोग का फैसला
भाजपा का कहना है कि इसमें सिर्फ शिक्षा विभाग के शिक्षक ही नहीं बल्कि सभी विभागों के शिक्षकों को चुनावी कामकाज की ड्यूटी दी गई है. इस बात का ध्यान रखा गया है कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित ना हो. लोकतंत्र के महापर्व में सभी कर्मचारी अपना सहयोग देते हैं. कर्मचारियों की ड्यूटी लगाना निर्वाचन आयोग का फैसला है.

नीति पर विचार
जिला शिक्षा अधिकारी अंजनी त्रिपाठी का कहना है यह निर्वाचन आयोग का फैसला है. शिक्षकों को चुनावी कामकाज की जिम्मेदारी देनी है. प्रदेश भर में हर जिले में शिक्षकों को जिम्मेदारी दी गई. चुनावी कामकाज में भोपाल में 300 शिक्षक लगे हुए हैं. स्कूल शिक्षा मंत्री इन्दर सिंह परमार का कहना है फिलहाल सीएम राइज स्कूलों के शिक्षकों को चुनावी कामकाज से मुक्त रखा गया है. आगे कोशिश यही रहेगी कि सभी शिक्षकों को शिक्षा के अलावा अन्य दूसरे कामकाज से मुक्त रखा जाए. इस पर नीति तैयार करने के लिए लगातार विचार किया जा रहा है.

Tags: Government, Madhya pradesh latest news, Teacher job

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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