हरियाणा की इस सेंक्चुअरी में एशिया की सबसे बड़ी प्राकृतिक झील! नजारे देखते रह जाएंगे


प्रदीप धनखड़/झज्जर: देश की राजधानी दिल्ली से सटे झज्जर में भिंडावास वन्य प्राणी विहार एवं झील प्रकृति प्रेमियों के लिए बेहद खास है. बताया जाता हे कि भिंडवास झील एशिया की सबसे बड़ी प्राकृतिक झील है. आधुनिकीकरण की चकाचौंध और मशीनरी शोर-शराबे से दूर झज्जर से करीब 15 किलोमीटर दूर एक पक्षी विहार एवं वन्य अभ्यारण भी है. इसकी स्थापना 1986 में हुई थी और 3 जून 2009 को इसे भारत सरकार द्वारा पक्षी विहार घोषित कर दिया गया था।

करीब 12 KM के एरिया में फैली झील एवं वन्य प्राणी विहार में हर साल 190 तरह से ज्यादा तरह के प्रवासी पक्षी आते हैं. साइबेरियन बर्ड्स की संख्या यहां सबसे ज्यादा सर्दियों के मौसम में देखने को मिलती है. 2 से 4 महीने पक्षी यहां ठहरते हैं और सर्दियां कम होने के बाद वापस लौट जाते हैं. झील के 12 किलोमीटर के क्षेत्र में गांव कनवाह, नवादा, चाढ़वाना, रेढूवास, बिलौचपुर, शाहजहांपुर लगते हैं.

अभ्यारण में बेहद शांति और पक्षियों की चहचहाहट लोगों को दीवाना बना देती है. विभिन्न तरह के पक्षी यहां घोंसला बनाकर रहते हैं. विदेशी पक्षियों के साथ-साथ बंदर, नीलगाय और हिरण भी यहां घूमते हुए आसानी से देखे जा सकते हैं. यहां बार हेडेड गूज, ग्रे लेग गूज, रेडशल डक, टफ्टेड डक आदि प्रवासी परिंदे देखे जा सकते हैं. देखा जाए तो भिंडावास झील सैलानी पक्षियों की सैरगाह के रूप में मशहूर है.

प्राकृतिक है भिंडावास झील
इस झील का निर्माण आसपास व्यर्थ बह रहे पानी को स्टोर करने के लिए किया गया था. इस झील के अंदर कई छोटे-छोटे टापू जैसे स्थल हैं, जो विदेशी पक्षियों को खूब भाते हैं. सैलानियों के लिए झील के चारों तरफ वॉच टावर भी बनाए गए हैं. जिसके ऊपर चढ़कर आराम से पक्षी प्रेमी पक्षियों को देख सकते हैं. भिंडावास झील पूरी तरह से प्राकृतिक है और शहरी चकाचौंध और शोर-शराबे से एकदम दूर है.

यहां एक म्यूजियम भी
पर्यटकों की जानकारी के लिए यहां पर एक म्यूजियम और इंस्पिरेशन सेंटर भी बनाया गया है. जहां पक्षियों के बारे में सैलानियों को पूरी जानकारी दी जाती है. इसके अंदर लाइट एंड साउंड के जरिए बच्चे पक्षियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी हासिल कर सकते हैं. पक्षियों के रूट मैप से लेकर उनके फोटो और प्रवास के दौरान की गतिविधियां यहां की दीवारों पर देखी जा सकती हैं.

इस समय यहां घूमने आएं
अगर आप भी भिंडावास पक्षी विहार एवं वन्य अभ्यारण आना चाहते हैं, तो सबसे उचित समय दिसंबर से लेकर मार्च तक का होता है. झज्जर-कोसली रोड पर शहर से करीब 15 किलोमीटर दूर भिंडावास झील है. यहां सर्दियों के समय में ही सबसे ज्यादा विदेशी पक्षी प्रवास के लिए आते हैं. यहां प्राकृतिक सुंदरता नष्ट न हो, इसके लिए भी विशेष हिदायत प्रशासन द्वारा समय-समय पर जारी की जाती हैं.

आएं तो बंदरों से रहें सावधान
यहां लाउड म्यूजिक बजाने, गाड़ी का हॉर्न बजाने और चीखने चिल्लाने पर प्रतिबंध है. यहां किसी तरह की नौकाएं भी नहीं चलतीं. क्योंकि ऐसा करने से पक्षियों को परेशानी हो सकती है. हां, यहां बंदरों से बचकर रहने की जरूरत है, क्योंकि यह न सिर्फ आपका खाना छीन कर भाग सकते हैं, बल्कि गाड़ियों को भी नुकसान पहुंचाते हैं.

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Author: Jagran Times

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