
रहमान/बस्ती. उत्तर प्रदेश के बस्ती जिला के रहने वाले विवेक राज (35 वर्ष) कर्नाटक की राजधानी बेंगलूरू में जातीय भेदभाव के शिकार हो गए. विवेक को मानसिक रूप से इतना प्रताड़ित किया गया कि उन्होंने मौत को गले लगा लिया. घटना बीते चार जून की है. विवेक राज बेंगलूरू में लाइफ स्टाइल कंपनी में काम करते थे. कंपनी के द्वारा उनको जो भी काम करने को कहा जाता था, उसे वो समय से पहले कर के बॉस के टेबल पर रख देते थे. इसी वजह से विवेक को जातीय भेदभाव का शिकार होना पड़ा.
दरअसल, विवेक राज अनुसूचित जाति (एससी) से आते थे. कामकाज और पर्फामेंस में जब वो अन्य कर्मियों से आगे निकल गए तो उनके साथ जातीय भेदभाव शुरू किया गया. उनके काम में कमी निकाली जाने लगी. विवेक के साथ जातीय भेदभाव करने वालों में उनकी बॉस मालती और दो अन्य कर्मचारी शामिल थे. विवेक ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी से NIFT की डिग्री हासिल की थी. उसके बाद, उन्होंने बेंगलूरू में लाइफ स्टाइल कंपनी में जॉब शुरू की, जहां जातीय भेदभाव के प्रताड़ना का शिकार होकर उन्होंने सुसाइड कर लिया.
विवेक की मौत से उसके बुजुर्ग पिता राजकुमार सदमे में हैं. उन्होंने बेंगलूरू में उसकी बॉस मालती और दो अन्य लोगों के खिलाफ धारा 3(1), एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया है.
बेटे की मौत पर न्यूज़ 18 लोकल से बात करते-करते पिता भावुक हो गये. उनकी आंखों में बेटे की मौत का दर्द आंसू बन कर छलक पड़ा. उन्होंने कहा कि मेरा बेटा बहुत होनहार था, लेकिन जातीय भेदभाव ने उसकी जान ले ली. मेरा अकेला बेटा था. वही घर का आखिरी चिराग था, जो अब बुझ गया है. उन्होंने अपने बेटे की मौत के लिए समाज को भी जिम्मेदार बताया.
पिता राजकुमार ने बताया कि विवेक की मां का 19 वर्ष पहले निधन हो गया था, लेकिन उन्होंने उसे मां और पिता दोनों की कमी कमी महसूस नहीं होने दी. वो (विवेक राज) दिन भर ने उन्हें पांच बार फोन कर हालचाल पूछता था. सुसाइड वाले दिन भी उसने दो बार फोन कर उनका हालचाल जाना था. बात करते समय विवेक बिल्कुल नॉर्मल लग रहा था. उन्होंने कहा कि जातीय भेदभाव को रोकने के लिए समाज और सरकार को आगे आना चाहिए, ताकि किसी और परिवार को यह दुख सहन न करना पड़े.






