
लखेश्वर यादव/जांजगीर चांपा. छत्तीसगढ़ का कोसा सिल्क पूरी दुनिया में अपने खास टेक्स्चर के लिए जाना जाता है. जांजगीर-चांपा जिला कोसा, कांसा, कंचन के नाम से विख्यात है. यहां के कारीगरों द्वारा निर्मित कोसा कपड़े को देश में ही नहीं बल्कि विदेश में भी ख्याति प्राप्त है. छत्तीसगढ़ में विदेशी पर्यटकों के आगमन के साथ ही यहां की कोसा सिल्क साड़ियों के निर्यात में दिनों-दिन बढ़ोतरी हो रही है. आज चाम्पा में निर्मित कोसा का कपड़ा और साड़ी सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि, विदेशों में भी निर्यात होता है.
प्रदेश के कोरबा और जांजगीर-चांपा जिले में मुख्य रूप से कोसा सिल्क तैयार किया जाता है. यह बेहद मजबूत होता है और पूरी दुनिया में अपने नर्म कपड़े के लिए जाना जाता है. यह सिल्क के सबसे शुद्ध प्रकारों में गिना जाता है. इसकी खासियत इसका रंग है. कोसा सिल्क प्राकृतिक रूप से हल्के गोल्डन रंग में मिलता है, जिसे पलाश, लाख और गुलाब की पंखुडिय़ों से बने रंगों से डाई किया जाता है.
कैसे बनता है कोसा सिल्क…
तितलियों के लार्वा से बने कोकून को जंगलों से इकट्ठा किया जाता है. इनमें से अच्छे कोकूनों को चुन कर उन्हें उबाला जाता है. उबालने के बाद इनसे रेशम का धागा निकाला जाता है. इस व्यवसाय से जुड़े लखन देवांगन ने बताया की 7 से 8 कोकून से मिलाकर एक पूरा लम्बा धागा तैयार होता है. इसके बाद धागे में रंग लगाया जाता है. सूखने के बाद धागे को लपेट कर एक गड्डी बनाई जाती है. जिसके बाद इस धागे से साड़ियों को तैयार किया जाता है. ग्रामीण प्राकृतिक रंगों से सिल्क को रंगते हैं. कोसा सिल्क की एक साड़ी को तैयार करने में 7 से 8 दिन लगते हैं.
कोसा सिल्क भारी डिमांड
पारंपरिक रूप से कोसा से सिर्फ साड़ियां बनाई जाती थीं, लेकिन अब इससे लहंगे भी बनाए जाते हैं. विदेशों में कोसा सिल्क के कपड़ों से कई तरह के डिजाइनर वेस्टर्न आउटफिट्स भी तैयार किये जाते हैं. आज सभी मौसम में कोसा सूटिंग, शटिंग, धोती-कुर्ता, सलवार सूट और साड़ियों का विशाल कलेक्शन बाजार में उपलब्ध है. इन्हें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बेचकर आर्थिक सम्पन्नता हासिल की जा रही है. आज देश के सभी बड़े शहरों दिल्ली, कलकत्ता, मुम्बई, चेन्नई, हैदराबाद, अहमदाबाद, नागपुर, जबलपुर, इंदौर, भोपाल, विशाखापट्टनम, जयपुर, आदि के साथ साथ विदेशों में भी चांपा के कोसे का व्यवसाय फैला हुआ है.
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FIRST PUBLISHED : June 17, 2023, 12:44 IST






