इस देश में 11 साल तक के बच्चे पहन रहे डायपर, अंडरवियर की तरह पहनकर जा रहे स्कूल! टीचरों की बढ़ी परेशानी

छोटे बच्चों को डायपर इसलिए पहनाया जाता है क्योंकि उन्हें बाथरूम का प्रयोग करना नहीं आता, ना ही वो बता पाते हैं कि उन्हें कब टॉयलेट जाने की जरूरत है. ऐसे में वो डायपर में ही पेशाब या मल त्याग देते हैं जिसके बाद उनके पाता पिता उसे फेंककर नया डायपर पहना देते हैं. पर कुछ ही सालों में बच्चों को डायपर की जरूरत नहीं पड़ती क्योंकि वो इतने समझदार हो जाते हैं कि ये बता सकें कि उन्हें कब बाथरूम जाना है और कब नहीं. इस समदारी की उम्र को हासिल करने के दौरान वो इतने बड़े हो जाते हैं कि स्कूल (Switzerland kids wearing diaper to school) जा सकें. इसी वजह से स्कूलों में आमतौर पर बच्चे डायपर पहनकर नहीं जाते.

पर इन दिनों स्विट्जरलैंड में एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है. वो ये कि यहां बच्चे स्कूल में डायपर (11 year old kids wearing diapers) पहनकर आने लगे हैं. डायपर का इस्तेमाल वो इस तरह कर रहे हैं, जैसे अंडरवियर पहन रहे हों! स्विट्जरलैंड बेहद खूबसूरत है और अपने पर्यटन क्षेत्रों के अलावा समृद्ध समाज के लिए भी जाना जाता है. लोगों की आमदनी ज्यादा है और ऐसे में यहां के लोग काफी मॉडर्न भी हैं. पर इतने मॉडर्न समाज में माता-पिता ऐसा क्यों कर रहे हैं कि बच्चों को डायपर पहनाकर स्कूल भेज रहे हैं?

kids wearing diaper in school

जानकारों ने बताया कि माता-पिता बच्चों को खुद से टॉयलेट इस्तेमाल करना नहीं सिखाते जिसकी वजह से उन्हें डायपर पहना देते हैं. (प्रतीकात्मक फोटो: canva)

कम उम्र में बच्चों को स्कूल भेजने के कारण है समस्या
इंसाइडर वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार स्विट्जरलैंड में टीचर्स इस समस्या को उजागर कर रहे हैं कि देश के स्कूलों में ऐसे बच्चों की संख्या बढ़ती जा रही है जो डायपर पहनकर आते हैं. स्विस फेडरेशन ऑफ टीचर्स की हेड डैगमार रॉसलर ने स्विस वेबसाइट “20 Minuten” से बात करते हुए कहा कि देश में 4 साल तक के बच्चों को भी स्कूल भेज दिया जा रहा है. ऐसे में माता-पिता उन्हें घरों में टॉयलेट इस्तेमाल करने का सही तरीका सिखा ही नहीं पा रहे हैं. पर ये समस्या सिर्फ 4 साल तक के बच्चों में नहीं है.

11 साल तक के बच्चे पहन रहे डायपर
चाइल्ड डेवलपमेंट एक्सपर्ट रीटा मेसमर ने कहा कि उनके पास एक 11 साल का बच्चा मरीज बनकर आया था जो डायपर पहनकर स्कूल जाता था. वो इसलिए क्योंकि उसे माता-पिता ने उसे सिखाया ही नहीं था कि खुद से टॉयलेट का प्रयोग कैसे करते हैं. उन्होंने कहा कि डायपर माता-पिता को आसान लगता है, इसलिए वो अपने बड़े बच्चों को भी पहना देते हैं जिससे उनकी मुश्किलें कम हो जाएं और उन्हें गंदगी साफ करने की कोई समस्या ना रहे.

डायपर बदलना नहीं है टीचरों की जिम्मेदारी
एक एजुकेशनल साइंटिस्ट ने तो ये तक कहा कि बच्चे स्कूल में डायपर ऐसे पहनकर आ रहे हैं जैसे वो अंडरवियर पहनकर आ रहे हों. डैगमर रोसलर ने कहा कि ये टीचर्स की जिम्मेदारी नहीं है कि वो बच्चों के डायपर चेंज करें और उनकी साफ-सफाई करें, माता-पिता को बच्चों को ये सिखाना होगा कि बाथरूम कैसे इस्तेमाल करते हैं. देश की कई टीचरों ने इस समस्या को उजागर किया है.

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Author: Jagran Times

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