
गौरव सिंह/भोजपुर. बिहार के भोजपुर जिला स्थित वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय (वीकेएसयू) में लैंगिक भेदभाव दूर करने के लिए तैयारी कर ली गई है. वीकेएसयू से संबद्ध भोजपुर, रोहतास, बक्सर और कैमूर जिले के कॉलेजों में महिला शिक्षिका एवं छात्राओं के साथ लैंगिक भेदभाव रोकने के लिए आंतरिक शिकायत कमेटी गठित होगी. इस संबंध में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सचिव प्रो. मनीष जोशी ने विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र भेजा है जिसमें कहा गया है कि शैक्षणिक संस्थानों, छात्रों एवं कामकाजी महिलाओं के साथ होने वाले यौन उत्पीड़न की घटनाओं को रोकने और उनका निवारण करने के लिए हर आंतरिक शिकायत कमेटी का गठन किया जाए.
कमेटियां यौन उत्पीड़न संबंधित शिकायत प्राप्त करेंगी और उनका कानूनी तरीके से निवारण भी करवाएंगी, ताकि महिलाओं और लड़कियों को उनके कार्यस्थल पर सुरक्षित माहौल दिया जा सके. वीकेएसयू के कुलपति प्रो. शैलेंद्र कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि आंतरिक शिकायत कमेटी का गठन कर उसके पदाधिकारियों का नाम और मोबाइल नंबर स्थल के दीवारों पर लिखने को कहा गया है. कमेटी गठन कार्यस्थल पर वरिष्ठ स्तर पर नियोजित महिला की अध्यक्षता में होगी जिसमें दो सदस्य संबंधित कार्यालय से व एक सदस्य गैर सरकारी संगठन से नियोजक के द्वारा चयनित किया जाएगा.
पीड़िता के अलावा उसके रिश्तेदार भी कर सकते हैं शिकायत
कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम 2013 के अंतर्गत जिस महिला के साथ कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न हुआ है, वो खुद शिकायत कर सकती है. यदि पीड़िता की शारीरिक या मानसिक स्थिति ठीक नहीं है तो उसके रिश्तेदार, मित्र, सहकर्मी, उसके विशेष शिक्षक, मनोचिकित्सक अथवा मनोवैज्ञानिक, संरक्षक या ऐसा कोई भी व्यक्ति जो उसकी देखभाल कर रहा हो अथवा ऐसा कोई भी व्यक्ति जो घटना के बारे में जानता है और जिसने पीड़िता से सहमति ली है वो राष्ट्रीय व राज्य महिला आयोग के अधिकारी से शिकायत कर सकते हैं.
90 दिन के अंदर करनी होगी शिकायत
अधिनियम के तहत लैंगिक उत्पीड़न की शिकायत घटना के 90 दिन के अंदर आंतरिक शिकायत समिति या स्थानीय शिकायत समिति में दर्ज करानी चाहिए. शिकायत लिखित रूप में दी जानी चाहिए. यदि किसी कारणवश पीड़िता लिखित रूप में शिकायत करने में सक्षम नहीं है तो समिति के सदस्यों को उसकी मदद करनी चाहिए. यदि शिकायत नियोजक के विरुद्ध है तो वो भी स्थानीय समिति में दर्ज कराई जाएगी. अधिनियम के अनुसार पीड़ित की पहचान गोपनीय रखना अनिवार्य है.
क्या होता है लैंगिक उत्पीड़न?
कार्यस्थल पर किसी भी महिला को उसकी इच्छा के विपरीत छूना या छूने की कोशिश करना, जो महिला के लिए असहज स्थिति पैदा करने वाली हो, उसे लैंगिक उत्पीड़न के दायरे में माना जाता है. शारीरिक या लैंगिक संबंध बनाने की मांग करना या उम्मीद करना भी लैंगिक उत्पीड़न है.
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FIRST PUBLISHED : June 12, 2023, 08:12 IST






