Ashadha Pradosh vrat 2023: देहरादून के आचार्य से जानें प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त, सेहत पर इस व्रत का असर

हिना आज़मी/देहरादून. अगर आप लंबी बीमारियों से जूझ रहे हैं तो आप प्रदोष व्रत करें. आषाढ़ का पहला प्रदोष व्रत कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाएगा. यह व्रत गुरुवार 15 जून को पड़ रहा है, इसलिए यह गुरु प्रदोष व्रत है. मान्यता है कि जो लोग बीमार होते हैं, वे इस व्रत को करने से निरोगी हो जाते हैं. इसे प्रदोष कहने के पीछे चंद्रमा से जुड़ी एक कहानी है. कहते हैं कि चंद्रमा को क्षय रोग हो गया था, जिसके चलते उन्हें मृत्युतुल्य कष्ट हो रहा था. इसके बाद भगवान शिव ने उस दोष का निवारण करने के लिए उन्हें त्रयोदशी के दिन पुन:जीवन प्रदान किया था. इसीलिए इस दिन को प्रदोष कहा जाने लगा.

देहरादून के आचार्य चंद्र प्रकाश ममगई ने कहा है कि प्रदोष व्रत हर माह में आता है और इस माह यह 15 जून को पड़ रहा है. इसमें त्रयोदशी और चतुर्दशी का संयोग माना जाता है. उन्होंने बताया कि प्रदोष व्रत पर भगवान भोलेनाथ का विशेष रूप से पूजन किया जाता है. जिन लोगों का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता और बड़ी बीमारियों से जूझ रहे हैं, वे लोग इस व्रत को करते हैं तो रोगमुक्त हो जाते हैं. इसके अलावा जिन लोगों की ग्रह की स्थिति ठीक नहीं होती है वे भी प्रदोष व्रत करते हुए दूध, दही, शक्कर, घी, पंचामृत से भगवान शंकर का अभिषेक करें तो उनके ग्रहों की स्थिति में सुधार आएगा. यह व्रती के लिए बहुत लाभदायक साबित होता है.

ये हरगिज न करें

आचार्य चंद्र प्रकाश ममगई ने बताया कि इस बार प्रदोष व्रत 15 जून गुरुवार के दिन पड़ रहा है इसीलिए यह श्रीहरि का व्रत और भक्ति का दिन होने के चलते भी विशेष है. उन्होंने बताया कि इस व्रत के दौरान लहसुन, प्याज जैसी तामसिक वस्तुओं का प्रयोग न करें और मांस-मदिरा से दूरी बनाए रखें. भगवान शिव की पूजा से पहले स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें. उन्होंने बताया कि इस दिन भगवान शिव को सिंदूर, तुलसी, हल्दी और नारियल पानी नहीं चढ़ाना चाहिए.

शुभ मुहूर्त

आचार्य चंद्र प्रकाश ममगई के मुताबिक, आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि यानी 15 जून (गुरुवार) को सुबह 8 बजकर 32 मिनट से लग रही है. इस तिथि का समापन 16 जून शुक्रवार को सुबह 8 बजकर 39 मिनट पर होगा.

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