गाय पर निबंध कैसे लिखें! वक्त के साथ बदली पशुधन की अहमियत


गाय पर निबंध लिखने से पहले एक छोटा-सा किस्सा शेयर कर रहा हूं. ऑफिस से घर आते समय मयूर विहार वाले फ्लाईओवर पर मेरे आगे चल रही गाड़ी ने अचानक ब्रेक लगाया. दूर से गाड़ी रुकती देख मैंने भी अपनी बाइक साधने की पूरी कोशिश की, लेकिन बाइक सधते-सधते फिसल गई. हालांकि, हेलमेट होने के चलते सिर पर तो चोट नहीं आई, लेकिन घुटने और कुहनी छिल गए, कपड़े और जूते भी बुरी तरह से फट गए. गाड़ी से उतरकर सज्जन मेरे पास आए. उन्होंने सड़क से उठने में मेरी मदद की. बाइक भी साइड में खड़ी की. इस पर वे जोर-जोर से कहने लगे- “भाई साब,,, जिसे हम गऊ माता कहते हैं ना उसकी वजह से ये सब हुआ है. आवारा घूमती रहती है. सड़कों पर इनकी वजह से आए दिन बड़े-बड़े हादसे होते रहते हैं. मैं तो कहता हूं, लोग पागल हैं जो इन्हें पूजते हैं. इन्हें तो डंडे मार-मार कर खदड़ना चाहिए. सत्यानाश किया हुआ है इन्होंने..लोगों को इनकी पूजा करनी छोड़नी चाहिए.”

मैं तब तक संभल चुका था और सड़क पर बिखरा अपना सामान समेट चुका था. मैंने उन्हें सड़क के एक साइड में ले जाकर पूछा- “क्या कभी किसी गाय ने कहा है कि लोग हमें माता कहें, हमारी पूजा करें, क्या कभी गाय को कहते हुए सुना है कि हमारे नाम पर राजनीति करो?”

वे सज्जन बोले- “नहीं तो”.

मैंने कहा- “फिर आप इन मासूम जानवर पर अपना गुस्सा क्यों उतार रहे हैं. जब इनकी हमें जरूरत थी तो ये हमारी माता थी. चौसठ करोड़ देवी-देवताओं का इनमें वास था. इनका दूध, गोबर और इनके बछड़े हमारे लिए धन थे. अब जरूरत नहीं है तो ये आवारा जानवर बन गई. जब हमारी जरूरत होती है तो हम इसका दूध निकाल लेते हैं और दूध निकालकर इन्हें सड़कों पर खुला छोड़ देते हैं. जरूरत होने पर हम इनके नाम पर राजनीति करते हैं. अब इन मामलों में गाय या किसी अन्य जानवर की भूमिका क्या है.?”

इस पर उनका क्रोध थोड़ा शांत हुआ और वे गर्दन हिलाते हुए गाड़ी में सवार होकर चले गए. किस्सा बस इतना भर है. अब आप कहेंगे कि इसमें गाय का निबंध कहां से आ गया. तो, बात दरअसल ये है कि मेरी बेटी के स्कूल होमवर्क में हिंदी विषय में यह काम दिया गया है कि उसे गाय पर निबंध लिखना है. असल समस्या यहां से शुरू हुई है. सात साल की बेटी ने गाय को केवल कूड़ेदान से कूड़ा खाते, बाजार में डंडा खाते, इधर-उधर गंदगी करते या फिर सड़क पर ट्रैफिक जाम करते हुए देखा है. जिस बच्चे के दिमाग में गाय की ऐसी तस्वीर हो,,भला उसके निबंध में कैसे लिख सकते हैं कि गाय हमारी माता है. और रही बात दूध की तो वो तो हमारे घरों में थैली में या फिर दूधिया की कैन में आता है.

जब मैंने बेटी से गाय के बारे में कुछ लाइनें बोलने के कहा तो उसने कहा- “गाय एक गंदा-सा जानवर होता है. वह सड़क पर गंदगी कर देता है. गाय गंदगी खाती है.”

बस..बस..बेटा बस..इतना ही बहुत है. मैंने उसे फौरन रोका.

हमारे समय में माता कहे जाने वाली गाय आज एक गंदे जानवर में तब्दील हो गई है. यह हालात बहुत खराब और सोचनीय हैं. ऐसा भी नहीं है कि हमारे समय में गाय के बारे में गलत पढ़ाया गया. ये सही है कि हमारे समय में गाय माता ही हुआ करती थी. लेकिन पिछले तीन दशकों में गाय की जो हालत हुई है,,, निबंधकारों को फिर से नए सिरे से गाय का निबंध लिखना होगा.

एक मित्र ने सुझाया कि बच्चों को गांव ले जाकर गाय के बारे में दिखाना और बतलाना चाहिए. अब उन मित्र को कैसे समझाएं कि शहर में तो फिर भी गाय को रोटी देने वाले दो-चार लोग मिल जाएंगे, गांवों का हाल तो उससे भी बुरा है. वही किसान जिसके लिए गाय धन हुआ करती है, आज डंडा लेकर उसके पीछे दौड़ता नजर आएगा, क्योंकि आज गाय उसकी फसलों को नष्ट कर रही है. अब गांव में लोग चर्चा करते हैं आवारा गायों के आतंक की.

कुछ दिन पहले जब में गांव गया था तो स्कूल की तरफ बड़ा हल्ला मच रहा था. पता चला कि गांव को लोगों ने गाय, बछड़ों और सांडों को घेर-घारके स्कूल की चारदीवारी में बंद किया हुआ है. इन्हें ट्रैक्टर-ट्रॉली में लाद कर गांव से दूर सीमा पर छोड़कर आने की तैयार चल रही है. देर रात में 20-25 गाय, बछड़े और सांडों को ट्रॉलियों में लादाकर गांव से 30-35 किलोमीटर दूर छोड़ा गया. इस कवायद में कई जानवरों को गंभीर चोट भी आईं.

हालांकि, मित्र के सुझाव से पूरी तरह से सहमत हूं कि बच्चों को गांव के दर्शन जरूर कराएं और गाय-भैंस के महत्व के बारे में बताएं.

ऐसे लिखें गाय पर निबंध
फिर भी निबंध तो लिखवाना ही है. मैंने गूगल बाबा पर खूब खोजा कि शायद किसी लेखक ने आधुनिक गाय पर निबंध लिखा हो,,लेकिन कुछ नहीं मिला. बच्ची को समझा-बुझा कर यही लिखवाना शुरू किया है-

“गाय एक बहुमूल्य पशु होती है. गाय के चार टांगें और एक पूंछ होती है. पूंछ से गाय मक्खियां उड़ाती है. गाय हमें दूध देती है. गाय का दूध पीकर बच्चे स्वस्थ्य बनते हैं. गाय के दूध से दही, घी और मिठाइया बनती हैं. गाय का गोबर उपले बनाने के काम आता है. इसके अलावा गाय के गोबर से खेतों के लिए अच्छी खाद तैयार होती है, जिससे अच्छी फसल उगती है. गाय के बछड़े बड़े होकर बैल बनते हैं जो खेत जोतने और सामान की ढुलाई के काम आते हैं. गाय की इतनी उपयोगिता को देखकर हम गाय को माता कहते हैं. कुछ लोग गाय की पूजा भी करते हैं.”

मुझे तो बचपन में जो गाय के बारे में पढ़ाया था यानी निबंध याद करवाया गया था, उसे एक परंपरा समझ लें या जिम्मेदारी, अगली पीढ़ी के लिए आगे बढ़ा दिया है. लेकिन जब कुछ बदल रहा है तो हमें गाय के निबंध के पुनर्लेखन पर भी विचार करना चाहिए.

Tags: Books, Cow, Hindi Literature, Hindi Writer, Literature

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Author: Jagran Times

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