
हाइलाइट्स
अंतरिक्ष में लिखने के लिए पृथ्वी पर उपयोग में लाए जाने वाले बॉलपेन काम नहीं करते हैं.
शुरुआत में लिखने लिए अंतरिक्ष यात्रियों के पास पेंसिल जैसा विकल्प उपलब्ध था.
कहा जाता है कि नासा ने लाखों खर्च कर खास पेन बनाया था, लेकिन कहानी कुछ और है.
कहानी मशहूर है. 1960 के दशक में जब नासा ने अंतरिक्ष में इंसानों को भेजा तो पाया कि वहां धरती पर चलने वाले बॉल पेन काम नहीं करते हैं क्योंकि वहां गुरुत्व नहीं होता है. ऐसे में नासा ने लाखों डॉलर खर्च कर अंतरिक्ष में इस्तेमाल किया जा सकने वाला खास पेन बनाया. लेकिन वहीं दूसरी तरफ रूस के कॉस्मोनॉट्स ने जब इस समस्या का सामना किया तो उन्होंने पेंसिल से काम चला लिया जिसके लिए गुरुत्व की जरूरत ही नहीं होती थी. यह सवाल भी कई बार पूछा जाता है कि नासा ने इतने पैसे बर्बाद करने की जगह पेंसिल का इस्तेमाल क्यों नहीं किया. बहुत कम लोग जानते हैं असल कहानी इस तरह की नहीं है.
लिखने की समस्या
दरअसल कहानी जो सुनाई जाती है कि ना तो पूरी तरह से सच है और ना ही पूरी तरह से गलत है. जब इंसानों ने अंतरिक्ष में सबसे पहले यात्रा की तो जल्दी ही इस बात को समझ लिया गया था क अंतरिक्ष में धरती पर इस्तेमाल होने वाले बॉलप्वाइंट पेन काम नहीं आएंगे क्योंकि उन्हें डिजाइन ही इस तरह से किया है कि वे गुरुत्व का उपयोग कर सकें.
क्यों नहीं कर सकते उपयोग?
बॉलप्वाइंट पेन को जब भी हम दीवार पर पने चलाने की कोशिश करते हैं तो हमें परेशानी होती है. क्योंकि इसमें स्याही गुरुत्व के प्रभाव से ही नीचे की ओर आती है और तभी हम लिख पाते हैं और जब हम दीवार पर लिखने का प्रयास करते हैं तो पेन क्षैतिज अवस्था में जाता है और सीधे खड़ी अवस्था में ना रहने पर स्याही नीचे तक नहीं आ पाती और हम लिख नहीं पाते हैं. यही हाल अंतरिक्ष में होता है.
पेंसिल का उपयोग?
अब बताया जाता है कि इस समस्या को सुलझाने के लिए नासा नेलाखों डॉलर खर्च कर एक खास पेन बनाया जो सूक्ष्मगरुत्व में काम कर सके. वहीं सोवियत अंतरिक्ष यात्रियों ने सामान्य ग्रेफाइट पेंसिल का उपयोग कर लाखों का खर्चा बचा लिया. लेकिन कहानी यहीं गलत हो जाती है. हकीकत तो यह है कि शुरु में तो चाहे अमेरिका के हों या फिर सोवियत के सभी अंतरिक्ष यात्रियों ने पेंसिल का इस्तेमाल किया था.
नासा ने नहीं बनाया था पेन
यह भी सच है कि नासा ने अंतरिक्ष में उपयोग के अनुकूल पेन बनाने के लिए कुछ पैसा खर्चा भी किया था. लेकिन नासा ने इस परियोजना को खुद ही बंद कर दिया जब पता चला कि इस काम में पैसा कुछ ज्यादा ही लग रहा है. लेकिन अंतरिक्ष में जो पेन उपयोग में लाया जाता है उसे एक स्वतंत्र निजी कंपनी फिशर पेन ने बनाया था जो आज भी फिशर स्पेस पेन के नाम से मशहूर है. एक बार जब यह पेन दुनिया के सामने आया तो अमेरिकी और सोवियत सभी अंतरिक्ष यात्रियों ने इसका इस्तेमाल करना शुरू कर दिया.
लेकिन फिर पेंसिल क्यों नहीं
यह समझना भी जरूरी है कि स्पेस के लिए खास पेन डिजाइन ही क्यों किया गया. क्या पेंसिल से काम नहीं चल रहा था आखिर पेंसिल में दिक्कत क्या थी. अंतरिक्ष में हर चीज तैरने लगती है. ऐसे में इस बात का ध्यान रखा जाता है वहां कोई हानिकारक या जलने वाली चीज यूं ही ना तैरने लगे. पेंसिल की लीड के कण स्पेस में फैल करनुकसानदेह हो सकते हैं. वहीं लकड़ी ज्वलनशील होती है. पेंसिल के सूक्ष्मस्तर से ग्रेफाइट के कण जो विद्युत सुचालक हैं उनका अंतरिक्ष यान में फैलना भी सही नहीं होता, ऐसा तब और जरूरी था जब अपोलो एक अभियान नाकाम हो गया था.
फिशर स्पेस पेन
सबसे पहले अंतरिक्ष के लिए बने पेन में ड्यूरो पेन कंपनी का फेल्ट टिप पेन का नाम आता है. लेकिन फिर बाद में फिशर स्पेस पेन सामने आया जो काफी बेहतर था. जिसकी खासियत यह थी कि इस पेन से स्याही लीक नहीं होती थी और इसके लिए कंपनी के एक बूंद रेजिन को स्याही में डाला था. यह पेन विविध तापमान, किसी भी स्थिति- सीधा या खड़ा , यहां तक चिकनी ग्रीस वाली सतह पर भी लिख सकता है.
.
Tags: Nasa, Research, Science, Space, USA
FIRST PUBLISHED : June 10, 2023, 10:09 IST









