ये तो टेंशन की बात है! झारखंड में भी मिलने लगा है एम्फ़ैटेमिन, कितनी खतरनाक है ड्रग्स की यह वेराइटी, कहां हुई रिकवरी?

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रांची. झारखंड में भी ड्रग्स के नशे का काला कारोबार तेजी से फैलता जा रहा है. ब्राउन शुगर, अफीम और गांजा के साथ-साथ अब झारखंड में एम्फ़ैटेमिन पाउडर (Amphetamine Powder) तक की सप्लाई होने लगी है. एम्फ़ैटेमिन पाउडर आमतौर पर पहले महानगरों या पंजाब आदि प्रदेश तक सीमित था. लेकिन, अब झारखंड में भी इसकी बिक्री हो रही है. आलम यह है कि बड़ी संख्या में झारखंड के युवा नशे की चपेट में आ रहे हैं. यही वजह है कि अब नशे के खिलाफ होने वाली कार्रवाई में एटीएस (ATS) को भी नई जिम्मेवारी दी गई है ताकि नशे के तस्करों पर लगाम लगाया जा सके.

झारखंड में पहली बार एम्फ़ैटेमिन पाउडर मिलने से झारखंड पुलिस मुख्यालय (Jharkhand Police Headquarter) भी गंभीर है और लगातार इसे लेकर दिशा निर्देश भी जारी कर रहा है. झारखंड के डीजीपी अजय कुमार सिंह ने भी बताया कि नशे के अवैध  धंधे और तस्करी पर नकेल कसने को लेकर ATS को भी विशेष जिम्मेवारी दी गई है. ऐसे में अब झारखंड में एटीएस की कार्रवाई का असर भी देखने को मिल रहा है. पिछले दिनों एटीएस ने रांची और चतरा के अफीम कनेक्शन को डिकोड करते हुए भारी मात्र में अफीम के साथ 3 तस्करों को दबोचा था. वहीं बरकाकाना (Barkakana) में जीआरपी की मदद से 1 करोड़ से ज्यादा की नशे की खेप बरामद की गई थी. यह बताता है कि नशे का अवैध कारोबार झारखंड के लिए बड़ा सिरदर्द है.

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3 फॉर्म मे मिलता है एम्फ़ैटेमिन

बताया जा रहा है कि कोकिन काफी महंगा होता है जिसे देखते ही उसके विकल्प के तौर पर एम्फ़ैटेमिन का इस्तेमाल किया जा रहा है. एम्फ़ैटेमिन 3 फॉर्म मे मिलता है जिसमें सिरप, टेबलेट और पाउडर फॉर्म है. पाउडर काफी नशीला होता है. अब तक लिंक और जानकारी के अनुसार ये पंजाब के रास्ते झारखंड तक आता है. हालांकि नारकोटिक्स विभाग और ATS इसको लेकर जांच का दायरा बढ़ा रही है. वहीं एम्फ़ैटेमिन पाउडर की रिकवरी के दौरान ATS की पूछताछ मे कई अहम जानकारियां भी सामने आई है. दरअसल ये नशे की खेप झारखंड के लिए नहीं थी. लेकिन इसकी नशे की खेप की सप्लाई पूर्व मे झारखंड में हो चुकी है.

बता दें, यह नशीला पदार्थ मध्य प्रदेश से हावड़ा जानेवाली ट्रेन में मिला था और उसमें 2 महिलाओं समेत 03 की गिरफ्तारी हुई है.  हालांकि झारखंड में इस तरह की रिकवरी पहली बार है. पूछताछ में यह बात जरूर सामने आई है कि इस गिरोह का लिंक झारखंड मे भी था और पूर्व मे इसकी डिलिवरी झारखंड के कुछ जिलों मे भी की गई थी, जिसकी जानकारी मिलने के बाद पुलिस को भी अलर्ट किया गया है.

तेजी से हो रही अफीम और गांजा की खेती 

मिली जानकारी के अनुसार झारखंड मे अफीम की खेती के साथ साथ अब गांजे की खेती भी बड़े पैमाने पर होनी शुरू हो गई. वहीं दूसरी तरफ बात कि जाए तो नशे के सौदागर अफीम की तस्करी को आसान बनाने को लेकर इसकी प्रोसेसिंग भी शुरू कर चुके हैं. चतरा में अफीम को प्रोसेस कर पाउडर में तब्दील किया जा रहा है ताकि आसानी से छुपा कर इस नशे के सामान को दूसरे राज्यों या फिर विदेश भेजा जा सके, जिसे देखते हुए झारखंड पुलिस इस पर अंकुश लगाने को लेकर नई रणनीति तैयार कर रही है. इस मामले की जानकारी देते हुए एडीजी अभियान संजय आनन्द लाटकर ने बताया कि की झारखंड में एक नेक्सस पाया गया है कि टीपीसी और पीएलएफ़आई के मदद से अफीम की खेती की जाती है. इसको लेकर भी जांच की जा रही है.

क्या कहते हैं मनोचिकित्सक 

झारखंड में नशे के बदलते पैटर्न की गिरफ्तार में सबसे ज्यादा युवा वर्ग आ रहे हैं. रिनपास के मनोचिकित्सक डॉ जेके सोलंकी बताते हैं कि नशे के मॉडर्न तरीके का सेवन करने वाले युवा एक बार में ही इसके दलदल में फंस जा रहे है, जिस कारण उनका भविष्य अधर में जा रहा है. खास तौर से लड़कियों में नशे की लत लगना सबसे चुनौती है क्योंकि उनके अभिभावक लोक-लाज की देर से उन्हें नशा मुक्ति केंद्र में भेजने से भी हिचकते हैं.

Tags: Drugs mafia, Jharkhand news, Ranchi news

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Author: Up Head Line

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