
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज नए संसद भवन का उद्घाटन करने के लिए तैयार हैं. देश के 20 विपक्षी दल इस समारोह का बहिष्कार करेंगे, कर रहे हैं, जबकि 25 दल लोकार्पण में शामिल होंगे. प्रधानमंत्री ने साझा किया कि कैसे लोग एक नई संसद प्राप्त करने के लिए ‘भावुक’ हैं, जो असंख्य संस्कृतियों के साथ-साथ ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना का प्रतिनिधित्व करता है. नए भवन को ‘लोकतंत्र का मंदिर’ बताते हुए, उन्होंने कामना की कि यह भारत के विकास पथ को मजबूत करे और लाखों लोगों को सशक्त बनाए. प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से नए भवन का वीडियो ट्विटर पर #MyParliamentMyPride के साथ साझा करने का आग्रह किया है. पीएम मोदी ने 10 दिसंबर, 2020 को नए संसद भवन की आधारशिला रखी थी.
उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर के कालीनों, त्रिपुरा के अगरतला के बांस से बने फर्श और राजस्थान के पत्थर की नक्काशी के साथ नया संसद भवन भारत की विविधता को दर्शाता है. अंग्रेजों से सत्ता के हस्तांतरण का प्रतिनिधित्व करने के लिए पहली बार तत्कालीन पीएम जवाहरलाल नेहरू द्वारा प्राप्त तमिलनाडु का एक ऐतिहासिक राजदंड ‘सेंगोल’ नए संसद भवन में स्थापित किया जाएगा. उद्घाटन समारोह की पूर्व संध्या पर, पीएम ने अपने निवास पर आदिनम साधु-संतों से मुलाकात की और उनका आशीर्वाद लिया. उन्होंने ‘सेंगोल’ के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व की बात की, जो उन्हें तमिलनाडु के शैव संतों द्वारा सौंपी गई.
यह त्रिकोणीय आकार की चार मंजिला इमारत है, जिसका निर्मित क्षेत्र 64,500 वर्ग मीटर है. इसके तीन मुख्य द्वार हैं- ज्ञान द्वार, शक्ति द्वार और कर्म द्वार. इसमें वीआईपी, सांसद और आगंतुकों के लिए अलग-अलग प्रवेश द्वार होंगे. टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड द्वारा निर्मित इस भवन में भारत की लोकतांत्रिक विरासत को प्रदर्शित करने के लिए एक भव्य संविधान हॉल, सांसदों के लिए एक लाउंज, एक पुस्तकालय, कई समिति कक्ष, भोजन क्षेत्र और पर्याप्त पार्किंग स्थान दिया गया है. इमारत में लोकसभा कक्ष में 888 सदस्य और राज्यसभा कक्ष में 300 सदस्य आराम से बैठ सकते हैं. दोनों सदनों की संयुक्त बैठक की स्थिति में निचले सदन में कुल 1,280 सदस्यों को समायोजित किया जा सकता है.









