
नकुल कुमार/पूर्वी चम्पारण.महिलाओं के मासिक धर्म के समय इस्तेमाल किया जाने वाला सेनेटरी नैपकिन कई ब्रांड का आपने देखा और सुना होगा. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं और लड़कियों को पीरियड के दिनों की तकलीफों से छुटकारा दिलाने वाला यह नैपकिन किस तरह तैयार किया जाता है. आज हम आपको बताते हैं कि किस तरह पूर्वी चंपारण जिले की ग्रामीण महिलाएं एक समाजसेवी संगठन ब्रावोफाउंडेशन से जुड़कर इसको तैयार करती हैं.
दरअसल, मोतिहारी में ब्रावोफाउंडेशन का मैन्युफैक्चरिंग सेंटर स्थापित है, जहां 15 महिलाएं सेनेटरी तैयार करती हैं.एक पैड को फाइनली बनने में 8 प्रक्रियाएं करनी पड़ती है. जिसमें मटेरियल की तोड़ाई, ग्राइंडिंग, वेटिंग, पंचिंग, बैक लेयर, सीलिंग, बटर पेपर और पैकेजिंग शामिल है.नैपकिन बनाने के लिए कच्चा माल के तौर पर मुख्य तौर पर 4 पदार्थों उपयोग किया जाता है. यह कच्चे पदार्थ दक्षिण भारत के कोयंबटूर से मंगाया जाता है. जिसमें कॉटन उड पल्प एवं पेपर उड पल्प, नॉन उड फैब्रिक एवं बटरफ्लाई पेपर शामिल है.
रॉ मटेरियल की तुड़ाई एवं वजन
सेनेटरी नैपकिन मैन्युफैक्चरिंगकी प्रारंभिक प्रक्रिया कॉटन उड पल्प एवं पेपर उड पल्प की बारीकी से तुड़ाई से शुरू होती है. तुड़ाई के बाद 20 ग्राम कॉटन उड पल्प एवं 70 ग्राम पेपर उड पल्प का वजन करके ग्राइंडिंग टेबल पर भेजा जाता है.निश्चित मात्रा में दोनों रॉ मैटेरियल को मिलाकर दो मिनट तक ग्राइंडिंग मशीन पर ग्राइंडिंग किया जाता है. इससे मिक्चर मटेरियल बारीकी से टूट जाते हैं एवं सॉफ्ट हो जाता है. ग्राइंडिंग के बाद प्राप्त मिक्सर का एक बार फिर से वजन किया जाता है. इस बार 12-12 ग्राम के मिक्सर को पंचिंग मशीन में डालकर पंचिंग की जाती है. यह प्रक्रिया लगभग 1 मिनट तक चार बार करनी होती है.
इस तरह से होती है पैकेजिंग और सीलिंग
संस्था के राजेश रंजनबताते हैं कि पंचिंग के बाद उस पर बैक लेयर चढ़ाया जाता है. यह एक तरह का अवरोधक का काम करता है. इसके बाद इसकी सीलिंग की जाती है. फिर बॉर्डर पर कॉल लगाया जाता है एवं स्ट्रेलाईट मशीन में 3 मिनट तक रखा जाता है. ताकि इसमें मौजूद बैक्टीरिया मर जाए. इसके बाद सेनेटरी नैपकिन को पैकेजिंग मशीन पर ले जाकर पैकेजिंग किया जाता है. इस तरह से सेनेटरी नैपकिन इस्तेमाल के लिए तैयार हो जाता है.राजेश रंजन कहते हैं कि फाउंडेशन के मैन्युफैक्चरिंग से निकले हुए सभी सेनेटरी नैपकिन लोक सेवार्थ बेटियों एवं महिलाओं के बीच नि:शुल्क बांट दिया जाता है.
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FIRST PUBLISHED : May 11, 2023, 13:17 IST









