पहाड़ों में भूत-प्रेत नहीं, बच्चें हो रहे इस मानसिक रोग के शिकार, जानिए कारण

हिमांशु जोशी/पिथौरागढ़. उत्तराखंड को देवी-देवताओं की भूमि कहा जाता है. यहां पहाड़ों में देवी-देवता के इंसानों पर अवतरित होने की घटना यहां आम बात है. जो यहां के लोगों की धार्मिक आस्था है लेकिन इस आस्था का बच्चों पर दुष्प्रभाव भी पड़ रहा है. बच्चें एक मानसिक रोग से ग्रसित हो रहे हैं जिसे विज्ञान की भाषा में मास हिस्टीरिया कहा जाता है.

इस बीमारी में बच्चें अचानक रोने-चिल्लाने लगते हैं और कई बार बेहोशी तक उन्हें आ जाती है.हाल में भी ऐसी ही एक घटना बागेश्वर के एक स्कूल में देखी गयी. जहां एक के बाद एक छात्राएं रोने-चिल्लाने लगी. जिसके बाद अब पिथौरागढ़ के एक सरकारी स्कूल में भी यह घटना देखने को मिली.इन सब घटनाओं की वजह जानने के लिए हमने बात की पिथौरागढ़ के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. ललित भट्ट से जिन्होंने इस घटना को एक मानसिक रोग बताया है जिसे मास हिस्टीरिया कहा जाता है.जिसमें एक समूह के लोग एक दूसरे को देखकर समान व्यवहार करते हैं.

घरेलू हिंसा से पीड़ित छात्राओं बीमारी की संभावना अधिक
डॉ.भट्ट बतातें हैं कि ज्यादातर छात्राओं को यह बीमारी होती है जो किसी घरेलू हिंसा से पीड़ित होती हैं. यह बात उनके जहन में बैठ जाती है क्योंकि वह इसका विरोध नहीं कर सकती .किसी अन्य व्यक्ति के उन्हें डांटने और धमकाने में वह कुछ इस तरह का रिएक्ट करती हैं क्योंकि उनके घरों में और आसपास के माहौल में वह बचपन से ही देवताओं को अवतरित होते देखती हैं. उनके मन में यह बस जाता है कि इस तरीके से उनकी समस्या का समाधान हो जाएगा. जब एक व्यक्ति इस तरह की गतिविधियां करता है तो और लोग जो इसी पीड़ा से गुजर रहे हैं वह भी स्वतः ही उस इंसान के जैसा रिएक्ट करने लगते हैं. आमतौर पर जिसे स्थानीय भाषा में भूत सवार होना या परी लगना समझा जाता है. इस समस्या से बच्चों को निकालने के लिए डॉ भट्ट कहते हैं कि जानकारी का प्रसार कर बच्चों के साथ अच्छे से बातचीत कर इस समस्या से निपटा जा सकता है.

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FIRST PUBLISHED : June 16, 2023, 18:50 IST

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Author: Jagran Times

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