
हिमांशु जोशी/पिथौरागढ़. पिथौरागढ़ के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बदलते मौसम ने यहां रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी है. ऐसा पहली बार देखने को मिला है कि मई-जून के महीने में यहां 10 से ज्यादा बार बर्फबारी हुई है. जिस कारण यहां रहने वाले लोग समय से खेती भी नहीं कर पा रहे हैं. और बदलते मौसम के कारण रास्ते बंद होने से तमाम सैलानियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा है.इन दिनों पिथौरागढ़ में आदि कैलाश यात्रा चली हुई है. जहां बर्फबारी होने से आदि कैलाश के दर्शन करना भी श्रद्धालुओं के लिए चुनौती बना हुआ है.
पिथौरागढ़ के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का मुख्य व्यवसाय खेती है. यहां जड़ी बूटी उत्पादन से भी लोग जुड़े हुए है. लेकिन बारिश बर्फबारी से इस बार यह उत्पादन घटा है. जिससे बेरोजगारी का संकट भी यहां के लोगों को सता रहा है. यहां के स्थानीय निवासी कुंदन चौहान का कहना है कि मौसम परिवर्तन से माइग्रेशन में जाने वाले लोगों को काफी दिक्कतें आ रही हैं और ऐसा पहली बार देखा गया है कि जून के महीने में भी बर्फबारी यहां हो रही है जिससे जनजीवन प्रभावित हो रहा है.
कृषि विभाग कर रहा है समीक्षा
पिथौरागढ़ के उच्च हिमालयी क्षेत्र दारमा, व्यास चौदास और मिलम घाटी में लोग गर्मियों में 6 महीने के लिए रहने आते हैं और इसी बीच खेती करके अपना गुजारा करते हैं. इस बार उत्पादन कम होने के वजह से यहां के लोग काफी परेशान भी हैं. इन इलाकों में मौसम की मार को लेकर पिथौरागढ़ की मुख्य कृषि अधिकारी ऋतु टम्टा को अवगत कराया गया .जिनका कहना है कि इस बार बारिश समय पर ना होने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ा है. जिसकी समीक्षा विभाग कर रहा है.और किसानों को राहत पहुंचाने की पूरी कोशिश उनके द्वारा की जा रही है.
पहाड़ की भौगोलिक स्थिति के लिए नहीं है अच्छा संकेत
पहाड़ों में फसलों की सिंचाई के लिए बारिश ही एकमात्र जरिया है. अगर बारिश समय से ना हो तो यहां के ग्रामीण इलाकों के लोगों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है. मौसम में लगातार हो रहे बदलाव पहाड़ की भौगोलिक स्थिति के हिसाब से अच्छा संकेत नहीं है.
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FIRST PUBLISHED : June 11, 2023, 17:26 IST






