रोल मॉडल जीनी; संघर्षों से लड़ कर पाया मुकाम…अब महिलाओं को सिखा रहीं सैलून का काम

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राहुल दवे/इंदौर: कहते हैं शौक से बढ़कर कुछ नहीं होता और वह शौक जब दूसरों की भलाई और सेवा से जुड़ा हो तो बात ही निराली है. ऐसा ही शौक इंदौर की रहने वाली जीनी देवलिया का है, जिसे उन्होंने अपना मकसद बनाया. परिणाम यह रहा कि अभी तक वह 560 से ज्यादा गरीब युवतियों और किशोरियों को अपने सैलून लाकर प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बना चुकी हैं. साथ ही इस कोर्स में आने वाले खर्च के साथ बच्चियों के आने-जाने का खर्च भी वह स्वयं उठाती हैं.

मेकअप और हेयर कटिंग में अपनी अलग ही पहचान बना चुकी जीनी देवलिया की सफलता के पीछे एक दर्द भरी कहानी है. वह बताती हैं जब वह बहुत छोटी थीं, तब माता-पिता का निधन हो गया और कुछ वर्षों बाद दादा-दादी भी नहीं रहे. ऐसे में 13 वर्ष की उम्र से ही वह संघर्ष करने के लिए मजबूर हो गईं. कुछ हुनर नहीं होने के चलते इस उम्र में उन्होंने केयर टेकर के रूप में काम शुरू किया. सागर, भोपाल और फिर इंदौर तक के इस सफर में उन्हें एक परिवार ऐसा भी मिला, जहां से उनकी जिंदगी बदल गई. उसी परिवार के लोगों ने उन्हें ब्यूटी से संबंधित दुनिया के हुनर को जानने में मदद दिलाई.

यूनिसेक्स सैलून से बनाई पहचान
ब्यूटी की दुनिया में कुछ अलग करने की चाह रखने वाली जीनी ने 2016 में यूनिसेक्स सैलून के साथ जिनी सोशल वेलफेयर सोसाइटी शुरू की और तबसे अब तक 560 से ज्यादा किशोरियों, युवतियों और महिलाओं को ब्यूटीशियन का प्रशिक्षण पूरी तरह निशुल्क दिया और यह सिलसिला अब भी जारी है. बताती हैं कि इस कोर्स में एक प्रशिक्षु पर करीब 50000 का खर्च आता है. उनकी इस कोशिश का परिणाम यह रहा कि कई युवतियों और महिलाओं को न केवल बेहतर रोजगार मिला, बल्कि उनके साथ घर में होने वाला बुरा बर्ताव भी बंद हुआ. महिलाओं में आत्मविश्वास इतना बढ़ा की वह आज सक्षम होकर परिवार पाल रही हैं.

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कोई अनाथ नहीं होता
सैकड़ों नारियों को प्रशिक्षण देने के पीछे जीनी की सोच कुछ अलग है. वह बताती हैं कि इस दुनिया में कोई अनाथ नहीं होता, जिसमें करने की चाह होती है, वह चाह ही उसका परिवार बन जाता है और परिवार के साथ वह व्यक्ति दुनिया में कुछ भी कर सकता है. जीनी इंदौर को अपना पिता बताती हैं, क्योंकि उनका मानना है कि इस शहर ने उन्हें बहुत कुछ दिया. इसको उन्होंने पिता मानकर कुछ निडर होकर स्टेप बाय स्टेप सफलता हासिल की.

16 दिन में रोल मॉडल
जीनी बताती हैं कि अभी वह 16 बच्चियों को प्रशिक्षित कर रही हैं. इन किशोरियों का चयन उन्होंने श्रम बस्ती में जाकर किया. मात्र 16 दिनों में ये प्रशिक्षु जीनी को अपना रोल मॉडल मानने लगी हैं और माने भी क्यों न, जीनी इन्हें मां का दुलार हो या गुरु की शिक्षा दोनों दे रही हैं. अकेली महिला का बाजार में किस तरह स्वावलंबी बनकर स्वरोजगार से नाम कमाना है, इसकी शिक्षा दे रही हैं.

निडर हो रहीं बेटियां
दबी सहमी ये बच्चियां मात्र 16 दिनों में मैनीक्योर, पेडीक्योर, वैक्सिंग, हेयर स्पा, थ्रेडिंग जैसी चीजें सीख कर कॉन्फिडेंस महसूस कर रही हैं. शुरुआती दिनों में मां-पिताजी के साथ आने वाली ये सहमी हुई बच्चियां अब खुद गरीब बस्ती से निकलकर सड़क परिवहन से जीनी तक पहुंचने की दूरी अकेले तय करने लगी हैं.

Tags: Indore news, Mp news, Women Empowerment, Womens Success Story

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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