
राहुल दवे/इंदौर: कहते हैं कि अगर ठान लो तो कुछ भी असंभव नहीं. ऐसा ही कुछ करके दिखाया है इंदौर की रहने वाली गुरदीप ने. गुरदीप के बारे में जान कर सभी लोग अचंभित हैं. कई दिव्यांग तो सिर्फ मूक-बधिर होते हैं, जो देखकर काम कर लेते हैं, लेकिन यह लड़की मूक-बधिर होने के साथ ही दृष्टिबाधित भी है. वैशाली नगर की छात्रा गुरदीप ने 56% अंक लाकर दसवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की है.
दरअसल, गुरदीप देख, सुन और बोल नहीं पाती. ऐसे में नॉर्मल राइटर गुरप्रीत का राइटर नहीं बन सकता. इसके चलते राइटर भी मूक बधिर अरेंज किया गया. भारत में ऐसा पहली बार हुआ है. इन सब के पीछे आनंद सोसाइटी की संचालिका मोनिका और आनंद पुरोहित का जो योगदान रहा, वह तारीफ के काबिल है. दोनों ने दिव्यांग छात्रा गुरदीप को राइटर उपलब्ध कराया.
गुरदीप ने उन सभी बच्चों और युवाओं के बीच एक आदर्श प्रस्तुत किया है. क्योंकि देख न पाने, सुन न पाने और बोल न पाने के बाद भी पढ़ाई के प्रति गुरदीप की ललक और खुद को साबित करने की जिद ने ही आज उसे इस मुकाम पर पहुंचाया, जहां वह चर्चा का विषय है. बेटी की इस उपलब्धि पर मां भावुक हैं. मां के आंसुओं ने खुद बेटी की सफलता की कहानी बयां कर दी.
बहन ने भी की मदद
हरप्रीत कौर जो गुरदीप की छोटी बहन है, परीक्षा के दौरान स्पर्श से पढ़ना और उसके लिए उसी विषय की किताबों का ढूंढना एक बड़ा टास्क था. क्योंकि गुरप्रीत इंग्लिश में ब्रेल लिपि पढ़ना जानती थी और हिंदी में उस किताब को ढूंढना मुश्किल हो रहा था. लेकिन फिर भी कोशिश के बाद गुरप्रीत की किताब मिली और रोजाना कई घंटों की मेहनत के बाद गुरप्रीत ने परीक्षा दी. परिणाम जो आया उससे गुरप्रीत के साथ-साथ पूरा परिवार खुशी से झूम रहा है.
तंज कसने वाले बधाई दे रहे
हरप्रीत ने यह भी कहा कि मेरी बड़ी बहन का सपना है कि वह ऑफिस जाकर काम करें, जैसे एक नार्मल व्यक्ति करता है. साथ ही यह भी बताया कि गुरदीप की शिक्षा को लेकर लोग तंज कसते थे. कहते थे कि इसको पढ़ा कर टाइम वेस्ट कर रहे हो. लेकिन आज मेरी बहन ने सभी के सवालों का जवाब दे दिया है. अब वही लोग फोन लगाकर हमें बधाइयां दे रहे हैं.
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FIRST PUBLISHED : May 27, 2023, 21:43 IST









