पूर्णिया से पूर्वोत्तर भारत के मौसम की मिलेगी सटीक जानकारी, पटना के बाद यहां लगेगा डॉप्लर रडार

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विक्रम कुमार झा/पूर्णिया. बिहार के पूर्णिया जिले में राज्य का दूसरा डॉप्लर रडार लगने वाला है. अभी तक यह केवल राजधानी पटना में स्थापित है. इसके लगने के बाद चीन समेत देश की पूर्वोत्तर सीमा से लगने वाले पांच देशों के एरियल एक्टिविटी पर नजर रखने के साथ मौसम की भी सटीक जानकारी मिलेगी. मौसम विज्ञान विभाग के अधिकारी राकेश कुमार ने इस संबंध में विशेष जानकारी देते हुए कहा कि पटना के बाद पूर्णिया में डॉप्लर रडार लगेगा. इसके लगने से कोसी-सीमांचल सहित 500 किलोमीटर तक के रेंज के क्षेत्र के मौसम की सटीक जानकारी मिलेगी. साथ ही, कई अन्य तरह की चेतावनी और जानकारी भी लोगों को मिलेगी.

राकेश कुमार ने न्यूज़ 18 लोकल को बताया कि यह एक्सबैंड डॉप्लर वेदर रडार होगा जिससे कृषि को फायदा होगा. यह स्ट्रांग डिटेक्शन रडार है. इससे इस क्षेत्र में जो ट्रफ लाइन है और साइक्लोन या बंगाल की खाड़ी में जो सिस्टम डेवलप होता है, उसका सटीक पूर्वानुमान के साथ चेतावनी जारी किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि कोसी-सीमांचल व नेपाल की तराई वाले क्षेत्र में जो नदियां हैं, उन नदियों में भारी बारिश की आशंका होने के पहले से चेतावनी जारी होगी. रडार के माध्यम से बारिश कैसी होगी, इसका सटीक पता चल पाएगा जिससे हम लोगों और किसानों को पहले से अलर्ट जारी कर पाएंगे. निचले इलाके के लोगों को बाहर निकालने में सुविधा होगी.

उन्होंने कहा बिहार में देखा जाए तो पटना के बाद पूर्णिया में डॉप्लर रडार लग रहा है. इससे बंगाल का कुछ एरिया, उत्तरी बिहार और दक्षिणी बिहार में आने वाले कृषि और ट्रांसपोर्टेशन को लेकर पूर्वानुमान जारी किया जा सकेगा.

कब तक लगेगा डॉप्लर रडार, लोगों को कैसे होगा फायदा

मौसम विज्ञान विभाग के अधिकारी ने कहा कि यह कार्य आखिरी पड़ाव पर चल रहा है. विस्तृत जानकारी पटना के मौसम विज्ञान विभाग के द्वारा मिल पाएगा. उन्होंने कहा कि डॉप्लर रडार के लगने से यहां के लोगों को विशेष फायदा होगा. तात्कालिक मौसम की चेतावनी जारी होती है. किसानों को मॉनसून का भी पूरा पता लगेगा. अगले दो-तीन घंटों में जो भी एक्टिविटी या गतिविधियां होने वाली होंगी, उसका पूर्वानुमान लगाया जा सकेगा.

राकेश कुमार ने कहा कि पिछले कई वर्षों से देखा जा रहा है कि ठंड के कारण कई लोग की मौत हो रही है. डॉप्लर रडार से उसको कम करने में मदद लिया जा सकता है. ठंड में होने वाली फ्रॉक की डेंसिटी की जानकारी सैटेलाइट इमेज से मिल जाती है. यह भी रडार के माध्यम से मिल जाता है.

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FIRST PUBLISHED : May 27, 2023, 11:57 IST

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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