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चायल तहसील सभागार में महीने के पहले और तीसरे शनिवार को सम्पूर्ण समाधान दिवस का आयोजन किया जाता है। इसके दरवाजे के बगल में महिला प्रसाधन कक्ष बना है। जिसका दरवाजा टूटा हुआ पड़ा है। इसके अलावा तहसील गेट के बगल में बने सार्वजनिक शौचालय में ताला लटक रहा है। इससे तहसील में आने वाले वादकारी इधर-उधर भटकते रहते हैं। लेकिन, किसी ने तहसील की व्यवस्थाओं को देखने की जहमत आज तक नहीं उठाई।
तहसील परिसर में आने वाली महिला वादकारियों के लिए टॉयलेट तो बना है। लेकिन, उसका दरवाजा काफी दिनों से टूटा हुआ है। उसमें महिला की सुरक्षा का कोई भी इंतजाम नहीं है। शौचालय में चारों ओर गंदगी फैली हुई है। जो महिलाएं अपने काम से तहसील परिसर में आती हैं वह पूरे परिसर में टॉयलेट तलाशती रहती हैं। शौचालय के लिए उन्हें शर्मसार होना पड़ता है। यही हाल तहसील मुख्य गेट के बगल में बने शौचालय का है। उसमें बराबर ताला बंद रहता है। लंबे समय से सफाई न होने से इसमें गंदगी का अंबार लगा है। मजबूरी में लोग इसके बाहर दीवार के किनारे पेशाब करते हैं। संपूर्ण समाधान दिवस में शनिवार को सैकड़ों महिला पुरुष अपनी फरियाद लेकर वहां पहुंचे। जिला स्तरीय सभी अधिकारी भी बैठे रहते हैं। लेकिन, किसी ने तहसील की व्यवस्थाओं को देखने की जहमत नहीं उठाई। शौचालय की जरूरत पड़ने पर वहां ताला लगा होने से लोगों को इधर उधर भटकना पड़ता है। लोगों का कहना है कि संपूर्ण समाधान दिवस में अधिकारी सैकड़ों समस्याओं का निदान कराते हैं। लेकिन, तहसील परिसर की समस्याओं पर उनकी नजर नहीं जाती। तहसील में पहली मंजिल पर जाने वाली सीढ़ियों के कोनों में भी गंदगी पसरी है। वादकारी और कर्मचारी वहां पर भी पीक थूकने से बाज नहीं आ रहे है। सबको स्वच्छता का पाठ पढ़ाने वाले अधिकारी खुद ही बेखबर बैठे हैं।






