अचानक कुत्तों को क्यों आ रहा है इतना गुंस्सा? वैज्ञानिकों ने सुलझाई पहेली, इंसान हैं इसकी बड़ी वजह, जानें


नई दिल्‍ली. दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन का असर बढ़ता जा रहा है. इस साल मई के महीने में उत्‍तर भारत का मौसम इतना ठंडा था कि कुछ दिनों के लिए लोगों के घरों के पंखे तक बंद हो गए थे. जून के महीने में भी अबतक कई इलाकों में खूब बारिश देखने को मिल रही है. हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के द्वारा किए गए एक शोध में यह पता चला है कि जलवायु परिवर्तन का असर कुत्‍तों पर भी पड़ रहा है. वो पहले से ज्‍यादा आक्रामक हो गए हैं. जिसके चलते लोगों को कुत्‍तों के द्वारा काटने की घटनाओं में बेतहाशा इजाफा हुआ है.

इस रिपोर्ट में बताया गया कि पर्यावरणीय बदलाव ने मनुष्यों को काटने वाले कुत्तों के दिन-प्रतिदिन की दर को प्रभावित किया है. एक रिसर्चर ने कहा, ‘हमनें देखा है कि तापमान में बदलाव, ओजोन लेयर और पीएम 2.5 के बढ़ने से कुत्‍तों के काटने की घटनाएं बढ़ गई हैं. साथ ही हमनें ये भी पाया कि यूवी इरेडिएशन (विकिरण) के स्‍तर के हाई होने का संबंध भी सीधे तौर पर कुत्‍तों के काटने की घटनाओं में बढ़ोतरी से हैं.’

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बंदरों और चूहों पर भी पड़ा असर
रिसर्चर का कहना है कि जलवायु परिवर्तन का असर सभी प्रजातियों में देखने को मिल रहा है. मनुष्‍य के अंदर भी तपमान बढ़ने की स्थिति में उग्र होने की घटनाएं अधिक देखी गई हैं. यही पैटर्न रीसस बंदरों और चूहों में भी देखने को मिला है. एक रिसर्चर ने कहा, ‘आम प्रदूषण में फेफड़ों में जलन के करण भी व्‍यवहार में परिवर्तन आ सकता है. इसके चलते दिमाग के काम करने के तरीके पर भी सीधा असर पड़ता है.’

गर्म तापमान में बढ़ जाती हैं कुत्‍तों के काटने की घटनाएं
कहा गया कि अंतर-प्रजाति आक्रामकता जैसे कुत्‍ते का काटना भी तापमान बढ़ने से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है. साल 2008 से 2018 के बीच अमेरिका में ये शोध किया गया. शोधकर्ताओं की टीम ने कुत्‍तों के काटने की 69,525 घटनाओं की स्‍टडी की. उन्‍होंने पाया कि गर्म तापमान वाले दिनों पर कुत्‍तों के काटने की अधिक घटनाएं सामने आई ज‍बकि बारिश के दिनों में यह संख्‍या कम रही.

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Author: Jagran Times

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