
मोहित शर्मा/करौली. लगातार परंपरागत खेती में होने वाले घाटे के बाद अब करौली का किसान भी खेती में नित नए नवाचार करके न केवल कुछ नया कर रहें है. बल्कि अपनी सालाना होने वाली इनकम को भी दोगुना कर रहे हैं. परंपरागत खेती को छोड़ और खेती में नवाचार करके अपनी आय दोगुनी की है करौली से 7 किलोमीटर दूरी पर स्थित बरखेड़ा गांव के किसान हरिचरण सैनी ने.
बरखेड़ा गांव के किसान हरिचरण सैनी ने आज से करीब 4 साल पहले सवा बीघे जमीन में साझेदारी में खट्टे फल नींबू की बागवानी से ना केवल अपनी बल्कि अपने इस नवाचार से जमीन के मालिक की भी किस्मत बदल दी है. परंपरागत खेती को छोड़ और खेती में किए गए इस नवाचार की सबसे अच्छी बात यह है कि आज इनके बाग में उम्दा और संतरा के आकार के नींबू की पैदावार होने के कारण आज इनके खट्टे फल नींबू की मांग दिल्ली तक रहती है.
4 साल पहले शुरू की थी नींबू की खेती
किसान हरिचरण सैनी का कहना है कि उन्होंने यह नींबू की खेती 4 साल पहले शुरू की थी. शुरुआत में उन्होंने सवा बीघे जमीन में छोटे-छोटे नींबू के पौधे लगाए थे. जिन्हें अच्छी मात्रा में जैविक खाद देकर और समय-समय पर दवाई का छिड़काव कर आज उन्होंने साझेदारी में सवा बीघा जमीन पर खट्टे फल नींबू की बागवानी से जमीन के एक एक कोने को इस प्रकार ढक दिया है कि आज इनके नींबू के बाग में कोई खड़ा रहना तो दूर आसानी से प्रवेश भी नहीं कर पाता.
दिल्ली तक जाता है इनका नींबू
किसान हरिचरण का कहना है कि आज उनके पेड़ों ने वृद्धि कुछ ऐसी की है कि उनकी सवा बीघे जमीन में लगे नींबू के पेड़ काफी तादात में फल देने के साथ-साथ उनमें संतरा के आकार का नींबू आ रहा है. वे बताते है कि हमारा नींबू स्थानीय स्तर पर जाने के बजाए अपने उम्दा किस्म के दिल्ली तक जाता है.
न्यूज़ 18 लोकल से बातचीत में किसान ने बताया कि उनके अच्छे फल की पैदावार के पीछे वजह समय-समय पर पानी, रोग से बचाने के लिए समय से दवाई का छिड़काव और समय-समय पर जैविक देशी खाद का उपयोग हैं.
मेहनत कम और लाभ का सौदा है यह खेती
किसान हरिचरण का कहना है कि गेहूं और सरसों की खेती के बजाय नींबू की खेती में बहुत कम मेहनत के साथ लाभ ज्यादा है. इसकी खेती के लिए जुताई गुड़ाई की भी बहुत कम आवश्यकता पड़ती है और नींबू की खेती परंपरागत खेती के बजाय पैदावार भी अच्छी देती है. उनका कहना है कि नींबू की खेती से आज उन्हें सवा बीघे जमीन में भी साझेदारी में खेती के दौरान उन्हें लाखों में इनकम होती है.
पानी की भी पड़ती है कम आवश्यकता
किसान के अनुसार नींबू की खेती के लिए पानी की भी बहुत कम आवश्यकता पड़ती है. शुरुआत में छोटे-छोटे पौधे होने के दौरान सिर्फ पानी की आवश्यकता पड़ती है. उसके बाद पौधे की वृद्धि होने के बाद गर्मी के मौसम में इस फसल के लिए केवल तीन बार पानी की आवश्यकता पड़ती है.
किसान हरिचरण की अन्य किसानों के लिए सलाह है कि अगर आपके पास बढ़िया जमीन है तो नींबू की खेती आपको कम लागत में फायदे का सौदा साबित हो सकती है.
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FIRST PUBLISHED : June 21, 2023, 15:47 IST






