बेंगलुरु. हिंदुस्तानी संगीत हो या रैप या पॉप, शास्त्रीय संगीत हो या फिल्मी संगीत का सफर, राग-रागिनियों के बारे में जानना हो या संगीत के अनोखे वाद्ययंत्रों को करीब से देखना हो, देश में सिर्फ एक ही जगह ऐसी है, जहां ये सारी जानकारी आपको मिल सकती है. वह है बेंगलुरु. जी हां, भारत की सिलिकॉन-वैली, जो इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी का हब मानी जाती है. इसी बेंगलुरु शहर में एक ऐसा अनोखा संग्रहालय है, जिसका जिक्र विश्व संगीत दिवस (World Music Day) के मौके पर किया जाना चाहिए. भारतीय संगीत के उद्भव, विकास के साथ-साथ इसकी विविधताओं, परंपराओं और प्रयोगों से रूबरू कराने वाला स्थान, जहां जाकर आप संगीत और इससे जुड़े ज्ञान के भंडार से साक्षात्कार कर सकते हैं.
बेंगलुरु के इस महत्वपूर्ण केन्द्र का नाम है ‘इंडियन म्यूजिक एक्सपीयरेंस म्यूजियम’ (IME) यानी ‘भारतीय संगीत अनुभव संग्रहालय’. अगर आप बेंगलुरु जाकर इस संगीत संग्रहालय में नहीं गए, तो समझिए जीवन का अनूठा अनुभव करने से चूक गए. आज विश्व संगीत दिवस है, इस मौके पर आइए आपको ले चलते हैं इंडियन म्यूजिक म्यूजियम की सैर पर, जिसके बारे में देश के बहुत कम लोगों को जानकारी होगी. मौजूदा दौर में जब इतिहास, फिल्म, नाटक, संगीत, कला और संस्कृति से जुड़े संस्थानों को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया गया है. आरोप लग रहे हैं कि सांस्कृतिक पहचान से जुड़े दस्तावेज और विरासत में घालमेल या उन्हें नष्ट करने की कोशिश हो रही है. ऐसे समय में भारतीय संगीत अनुभव संग्रहालय (IME) के बारे में बताना जरूरी है, ताकि लोग, खासकर युवा भारतीय संगीत के दस्तावेजीकरण और इस विरासत के महत्व के प्रति जागरूक हो सकें.
संगीत के समृद्ध विरासत से करें साक्षात्कार
बता दें कि 50 हजार वर्ग फुट, 3 मंजिलों और 9 कला दीर्घाओं में फैला आईएमई भारत का पहला इंटरैक्टिव संगीत संग्रहालय है. 10 साल तक संगीत मर्मज्ञों, विशेषज्ञों और तकनीक के ज्ञाताओं की अथक मेहनत के बाद यह संग्रहालय बनाया गया है. जेपी नगर 7वें ब्लॉक में ब्रिगेड मिलेनियम एवेन्यू में बने इस अनूठे संग्रहालय को बनाने का मकसद भारतीय संगीत के उद्भव और विकास के प्रति सम्मान का प्रदर्शन तथा युवाओं को भारतीय संगीत की समृद्ध विरासत और विविधता से रूबरू कराना रहा है.
भारतीय संगीत अनुभव संग्रहालय में शास्त्रीय, पाश्चात्य, हिंदुस्तानी सभी तरह के संगीत को जानने-समझने का मौका मिलता है.
3 मंजिला भवन, 9 गैलरी और असीमित ज्ञान
संग्रहालय की 9 आर्ट गैलरी लोक संगीत, पॉप म्यूजिक, बॉलीवुड और समकालीन संगीत की विभिन्न शैलियों को बहुत ही रोचक अंदाज में पेश करती हैं. यह गैलरी ऑडियो-विजुअल सिस्टम के जरिए हर प्रकार के संगीत को सुनने में मदद करती हैं, बल्कि आपको अपना म्यूजिक बनाने की भी सहूलियत देती है. आप संगीत प्रेमी हैं या नहीं, बच्चे हैं या नौजवान या बूढ़े संग्रहालय में आने के बाद कोई फर्क नहीं पड़ता. आप तो बस म्यूजिक के साथ खेलिए, वाद्ययंत्रों और कलाकृतियों को देखकर शांतिपूर्ण माहौल में आनंद लीजिए. जानिए संगीत के 9 रसों, उनके गाये जाने वाले समय और संगीत घरानों, संगीत के दिग्गजों के बारे में.
एक छत के नीचे ग्रामोफोन की दुनिया, मोबाइल का संसार
इन आर्ट गैलरी में से एक स्टार गैलरी में आपकी मुलाकात होगी बिस्मिल्लाह खां की शहनाई से, जो उनके परिजनों ने खां साहब से इंतकाल के बाद संग्रहालय को भेंट की थी. इसी तरह एमएस सुब्बुलक्ष्मी का तंबूरा, भीमसेन जोशी, पं. जसराज की पोशाक देख सकते हैं. पं. रविशंकर सहित भारतीय संगीत के सौ दिग्गजों के बारे में आप जानकारी ले सकते हैं, उनके संगीत को सुन सकते हैं. अगली रीचिंग आउट गैलरी में ग्रामोफोन से मोबाइल युग तक की साउंड और म्यूजिक रिकॉर्डिंग के सफरनामे के बारे में बहुत रोचक अंदाज में आप जान सकेंगे.
आईएमई बेंगलुरु का एक दीर्घा महात्मा गांधी और कविगुरु रविन्द्रनाथ टैगोर को समर्पित किया गया है.
फिल्मी संगीत का जानदार सफर
‘स्टोरीज थ्रू सांग्स’ नामक गैलरी के इस हिस्से में हिन्दी फिल्म संगीत के विभिन्न युगों की झलक मिलती है. संघर्ष के गीत यानी सॉन्ग्स ऑफ स्ट्रगल नामक गैलरी मे इस बात की पड़ताल की गई है कि संगीत राजनीतिक आंदोलनों का हिस्सा कैसे हो सकता है. भारत के राष्ट्रीय आंदोलन से, जहां लोगों को एकजुट करने के लिए संगीत का इस्तेमाल किया गया था. विरोध के गीतों से लेकर विद्रोह के गीतों तक कैसे संगीत में बदलाव लाने की ताकत है, यह पता चलता है. इस गैलरी की मुख्य विशेषता यह है कि यहां वंदे मातरम गीत के 35 से अधिक संस्करण, एमएस सुब्बुलक्ष्मी को महात्मा गांधी के पत्र की प्रतिकृति और देशभक्ति का शानदार संकलन देखने, सुनने को मिल सकता है. गैलरी में राम कथा सुनाती लकड़ी की कांवड़ किताब आपका दिल मोह लेगी. लोककला की बात की जाए तो चाहे बच्चे का जन्मना हो या विवाह या मृत्यु-तेरहवीं. हर खुशी, हर ग़म को गीतों के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया है. कांवड़ किताब, कठपुतली कला या लोक भित्ति चित्रों का प्रदर्शन जैसी कलाओं में संगीत का सफरनामा मिलता है. गैलरी का एक कोना महात्मा गांधी और कविवर रविन्द्र नाथ टैगोर को समर्पित है. इंस्ट्रूमेंट गैलरी में मयूर वीणा और नाग के आकार का संगीत यंत्र आपको विस्मृत कर देगा.
लिविंग ट्रेडिशन गैलरी
100 से ज्यादा वाद्ययंत्रों की प्रदर्शन, उनके बनाने और बजाने की तकनीक की जानकारी रोमांचित करने वाली साबित होगी. इस प्रकार लेग यानी पांव से बजाए जाने वाले हारमोनियम, ब्रास बैंड का आकर्षक डिस्प्ले वायलिन, हारमोनियम जैसे संगीत यंत्रों का इतिहास जानना हमें जड़ों की ओर ले जाता है. इसी तरह हिन्दुस्तानी शास्त्रीय और संगीत की बुनियादी अवधारणों को लिविंग ट्रेडिशन गैलरी में प्रदर्शित किया गया है, जो बताता है कि श्रुति, राग, ताल, घराना, ध्रुपद, ख्याल गायकी आदि क्या है, उनके क्या मायने और महत्व हैं. रेडियो, सीडी, बाइस्कोप, साउंड स्टूडियो बगैरह-बगैरह सब कुछ संग्रहालय में मिलेंगे.

ग्रामोफोन से लेकर संगीत की अत्याधुनिक विधा तक की जानकारी इस अनूठे संग्रहालय में आपको मिलेगी.
ज्ञान के साथ-साथ अनुभव भी लीजिए
इसी प्रकार जब इंडी पॉप संगीत और रॉक संगीत के साथ दुनिया को प्रभावित करने वाले हाइब्रिड इंटरैक्टिव म्यूजिक, उनके आइकन की बात होगी, तो वह सब और सबका संगीत आप यहां सुन सकेंगे, इतिहास और उनके महत्व के बारे में जान सकेंगे. दलेर मेंहदी की पोशाक, एक इंटैरेक्टिव टच स्क्रीन मिनी थियेटर ऑटो पर बैठकर फिल्म देखना बहुत ही मनोरंजक होगा.
साउंड गार्डन में उपजता है संगीत
संग्रहालय के साउंड गार्डन के तो क्या ही कहने, यहां आपको ध्वनियों और कंपन से उपजे संगीत को आप खोज सकते हैं. यहां पता चलता है कि पत्थरों और धातुओं से भी कैसे संगीत बनाया जा सकता है. तो यदि आप बेंगलुरु में हैं या जा रहे हैं और संगीत की अद्भुत अनुभूति करना चाहते हैं तो इंडियन म्यूजिक म्युजियम जरूर जाइए. लेकिन शर्त यह है कि शांत मन से और थोड़ा समय लेकर जाइए, क्योंकि भारतीय संगीत का संसार और उसकी माया अपरंपार है.
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Tags: Classical Music, Entertainment Special, Museum Storage, Music
FIRST PUBLISHED : January 06, 2023, 15:22 IST






