
प्रदीप कश्यप/सतना. लू के थपेड़ों के बीच हलक सूखाती गर्मी में जब आदमी को पानी का मोल मालूम होता है, ऐसे में बेजुबान लावारिस घूम रहे जानवर बूंद-बूंद पानी के लिए इधर-उधर भटकते हैं. पशु नाले नालियों का गंदा पानी पीकर प्यास बुझाने को मजबूर होते हैं. ऐसे में एक अनोखी पहल युवा समाजसेवियों ने की है. शहर के प्रतिष्ठान और घरों के बाहर नांद रखी जा रही है और उस नांद में पानी भरकर बेजुबानों की प्यास बुझाने का काम किया जा रहा.
युवा समाजसेवी टीम के अध्यक्ष अंकित शर्मा ने बताया कि लगातार हमारी टीम शहर के प्रतिष्ठानों, घरों और मंदिरों के बाहर नांद रखी जा रही है. इस भीषण गर्मी में पारा 44 से 45 डिग्री सेल्सियस चल रहा है. ऐसे में जब इंसानों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है, तो बेजुबान जानवरों का क्या हाल होता होगा. हमने गाय, कुत्ते और अन्य पशुओं को पानी के लिए भटकते हुए देखा है. तब से हमारे मन में एक विचार आया कि बेजुबान जानवरों की प्यास बुझाने के लिए नांद रखनी चाहिए और ऐसे में हम 25 लोगों की युवा टीम मिलकर नांद की व्यवस्था करते हैं. शहर के अंदर कई प्रतिष्ठान और मंदिरों के बाहर नांद रखी जा रही है, जिसमें पानी भरने की जिम्मेदारी भी घर के मालिक और प्रतिष्ठान संचालक, मंदिर के पुजारी को दी गई है. इसके साथ ही हम लोगों से आग्रह भी करते हैं कि आप भी बेजुबान जानवरों की मदद के लिए आगे आए.
पूरे शहर में करीब 50 सीमेंट की नांदें रख चुके है
इस भीषण गर्मी में इंसान पानी के लिए परेशान हो सकता है, तो बेजुबान जानवर भी प्यास बुझाने के लिए परेशान होते हैं. इसी सोच के साथ युवा समाजसेवीयो ने शहर भर में बेजुबान जानवर गाय कुत्ते और अन्य जानवरों की प्यास बुझाने के लिए नांद रखकर उसमें पानी भरा जा रहा है, ताकि सड़कों से निकलने वाले बेजुबान जानवर उस पानी को पीकर अपनी प्यास बुझा सके. युवाओं की माने तो शहर भर में अभी तक उन्होंने करीब 50 सीमेंट की नांदें प्रतिष्ठानों, मंदिर और घरों के बाहर रखी जा चुकी है, जिसमें वहा के मेंबर के द्वारा पानी भरने की भी जिम्मेदारी सौंपी गई है. सड़कों से आने जाने वाले जानवर उस पानी को पी कर अपनी प्यास बुझा रहे हैं.
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FIRST PUBLISHED : June 20, 2023, 17:55 IST






