OMG! यहां एक कमरे में 18 साधुओं ने एक साथ ली जीवित समाधि, जानें रहस्यमयी त्रिशूल की कहानी


अभिनव कुमार/दरभंगा. सनातन धर्म में जिन्हें ईश्वर से बेतहाशा प्रेम और लगाव हो जाता है, उन्हें जीवन में कभी किसी बात और किसी वस्तु की कमी नहीं होती. किसी चीज का दर्द नहीं होता. वह तो हंसते-हंसते अपने प्राण त्याग भी कर देते हैं. जिसका प्रमाण जिले के बहादुरपुर क्षेत्र अंतर्गत आने वाले उस्मा मठ गांव में है. इस गांव में स्थानीय लोगों के साथ दूरदराज के लोगों की भी आस्था जुड़ी हुई है. इस मठ में एक कमरा है. बताया जाता है कि 18 साधुओं ने समाधि ली है. इनमें से एक साधु बाबा पतित भारती नाम के हैं, जिन्होंने जीवित समाधि ली है. वहां पर उनका त्रिशूल आज भी है. मान्यता है कि जिस दिन त्रिशूल झुक जाएगा, उस दिन उनका शरीर प्राण त्याग देगा.

पूरे गांव वालों के साथ बैठक कर बाबा पतित भारती ने समाध ली

स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरे गांव वालों के साथ बैठक कर बाबा पतित भारती समाधि ली. उन्होंने उस वक्त इन ग्रामीणों के जो पूर्वज थे, उन्हें बताया था कि जिस दिन यह त्रिशूल झुक जाएगा. समझ लेना उस दिन मेरे शरीर ने प्राण त्याग दिए हैं, लेकिन स्थानीय लोगों की आस्था है कि आज तक यह त्रिशूल झुका नहीं और आज भी यहां के लोग जमीन के अंदर दफन उस बाबा को जीवित मानते हैं.

लोगों ने बताया कि बाबा का प्रमाण है यह कमला नदी है. बाबा इसे यहां लाए थे, वह कभी सूखती नहीं है. यहां 18 बाबाओं की समाधि एक कमरे के अंदर है और दो बाबा कमरे के बाहर समाधि में हैं. जब तक यह त्रिशूल खड़ा है, तब तक बाबा जमीन के अंदर जिंदा हैं. जिस दिन यह झुक जाएगा मतलब बाबा के शरीर ने प्राण त्याग दिए हैं. इनमें इतनी शक्ति है कि गांव में किसी की ‘बनेगी’ छोटी पड़ जाती थी (‘बनेगी’ घर के ऊपर बने छप्पर को कहते हैं) तो बाबा उसे भी लंबा कर देते थे.

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Author: Jagran Times

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