Ashadha Purnima 2023: कब है आषाढ़ पूर्णिमा व्रत? कब होगा स्नान और दान? जानें पूजा मुहूर्त और पाताल की भद्रा का समय

Share Now:

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें


हाइलाइट्स

आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा तिथि​ 02 जुलाई रविवार को रात 08 बजकर 21 मिनट पर प्रारंभ हो रही है.
आषाढ़ पूर्णिमा के दिन दो शुभ योग ब्रह्म और इंद्र बन रहे हैं.

आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को आषाढ़ पूर्णिमा का व्रत रखा जाएगा और उस​ दिन स्नान और दान होगा. इस बार आषाढ़ पूर्णिमा के दिन भद्रा लगी है, जिसका वास पाताल लोक में है. हालांकि यह भद्रा केवल 1 घंटा 20 मिनट के लिए ही है. वैसे तो पाताल और स्वर्ग की भद्रा का दुष्प्रभाव मृत्यु लोक यानि पृथ्वी पर नहीं माना जाता है. काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट से जानते हैं आषाढ़ पूर्णिमा कब है? स्नान दान और पूजा का मुहूर्त क्या है?

आषाढ़ पूर्णिमा 2023 तिथि
कैलेंडर के अनुसार, इस साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि​ 02 जुलाई रविवार को रात 08 बजकर 21 मिनट पर प्रारंभ हो रही है. इस तिथि का समापन अगले दिन सोमवार को शाम 05 बजकर 08 मिनट पर होगा. उदयातिथि के आधार पर आषाढ़ पूर्णिमा व्रत और स्नान-दान 3 जुलाई को किया जाएगा.

यह भी पढ़ें: घर में क्यों नहीं जलानी चाहिए अगरबत्ती? 4 बड़े कारण हैं जिम्मेदार, पूजा में क्या है इसका विकल्प?

2 शुभ योग में है आषाढ़ पूर्णिमा 2023
3 जुलाई को आषाढ़ पूर्णिमा के दिन दो शुभ योग ब्रह्म और इंद्र बन रहे हैं. इस दिन ब्रह्म योग दोपहर 03 बजकर 45 मिनट तक है, उसके बाद से इंद्र योग प्रारंभ हो जाएगा. ये दोनों ही योग पूजा पाठ आदि के ​लिए शुभ हैं.

आषाढ़ पूर्णिमा 2023 मुहूर्त
आषाढ़ पूर्णिमा के दिन सुबह से ही स्नान, दान और पूजा के लिए मुहूर्त बना है. इस दिन अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त सुबह 05:27 बजे से सुबह 07:12 बजे तक है. उसके बाद शुभ-उत्तम मुहूर्त सुबह 08:56 बजे से सुबह 10:41 बजे तक है.

आषाढ़ पूर्णिमा 2023 चंद्र अर्घ्य समय
आषाढ़ पूर्णिमा को शाम 07 बजकर 40 मिनट पर चंद्रमा का उदय होगा. जो लोग व्रत रखेंगे, वे इस समय पर चंद्रमा की पूजा करने के बाद अर्घ्य देंगे. चंद्र अर्घ्य और पूजा करने से जीवन में सुख और शांति आती है.

यह भी पढ़ें: मंगल दोष के 5 संकेत, गुस्सैल मिजाज, रोग, तनाव करते हैं परेशान, 3 आसान उपायों से मंगल होगा मजबूत

आषाढ़ पूर्णिमा 2023 पर भद्रा
3 जुलाई को आषाढ़ पूर्णिमा वाले दिन सुबह में 1 घंटा 20 मिनट के लिए भद्रा है. उस दिन भद्रा का समय सुबह 05 बजकर 27 मिनट से सुबह 06 बजकर 47 मिनट तक है.

आषाढ़ पूर्णिमा का महत्व
आषाढ़ पूर्णिमा के दिन व्रत रखकर सत्यनारायण भगवान की पूजा करते हैं. उनकी कथा का आयोजन होता है. ऐसा करने से परिवार में सुख और समृद्धि आती है. आषाढ़ पूर्णिमा की रात चंद्रमा पूजा से कुंडली का चंद्र दोष दूर होगा. रात्रि के समय में माता लक्ष्मी की पूजा करने से धन में वृद्धि होती है.

Tags: Dharma Aastha, Religion

Source link

Up Head Line
Author: Up Head Line

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें