छत्‍तीसगढ़ के इस स्‍थान पर छिपा है अद्भुत भौगोलिक रहस्‍य, 21 जून को नजर नहीं आती है परछाई, विशेषज्ञों से समझें

सूरजपुर. छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में स्थित महान नदी के तट पर भैसामुंडा में भारत का एकमात्र वह स्थान है, जिसमें भूगोल का रहस्य छिपा है. दरअसल कर्क रेखा यानि काल्पनिक रेखा और भारतीय मानक समय रेखा ये दोनों ही रेखा सूरजपुर के भैसामुंडा मे एक-दूसरे को क्रॉस करती है, जहां कर्क रेखा भारत के आठ राज्यों से गुजरती है और भारतीय मानक समय रेखा पांच राज्यों से गुजरती है. कर्क रेखा पांच प्रमुख अक्षांस रेखाओं में से एक है जो पृथ्वी के मानचित्र पर परिलक्षित है और यह रेखा सूर्य के स्थिति को बताता है. इसी से भौगौलिक परिवर्तन की गणना होती है. वहीं भारतीय मानक समय रेखा जिससे भारत के समय की गणना होती है और यह रेखा पृथ्वी के मानचित्र पर भारत को दो बराबर हिस्सों में बांटती है. भूगोल के इन दो अहम रेखाओं के बारे में हर किसी ने बचपन मे पढ़ा होगा और कई प्रतियोगी परीक्षाओं में इन दो रेखाओं पर कई सवाल भी पूछे जाते हैं. ऐसे में इन दोनों रेखाओं का क्रॉस प्वांइट सूरजपुर मे है. लोगों ने केवल पुस्तकों मे पढ़ा है, लेकिन सूरजपुर के निवासी इस स्थल को प्रत्यक्ष रूप से देख सकते है.

भूगोल के व्याख्याता गोवर्धन सिंह का कहना है कि जिले का भैसामुंडा स्थल छात्रों के लिए बेहद अहम है. इस स्थान पर काल्पनिक रेखा और भारतीय मानक समय रेखा का एक-दूसरे को क्रॉस करना इसे खास बनाता है. सूरजपुर जिला मुख्यालय से लगभग 45 किलोमिटर की दूरी पर अंबिकापुर-बनारस मार्ग के महान नदी के तट पर भैसामुंडा मे कर्क रेखा और भारतीय मानक समय रेखा एक-दूसरे को काटती है. ऐसे में जून क्रांति के समय सूर्य कर्क रेखा के एकदम ऊपर होता है और 21 जून को सूर्य इस स्थान पर ठीक ऊपर होने के कारण दिन काफी लंबा होता है और रात छोटी होती है. साथ ही इस स्थान पर आपको दोपहर मे आपकी परछाई बिल्कुल भी नजर नहीं आएगी. वहीं इस स्थान को चार साल पहले तत्कालिन कलेक्टर ने पहल कर पर्यटन के रुप में विकसित करने का प्रयास किया था, जिससे लोगों के भोगोलिक ज्ञान को बढ़ाया जा सके, लेकिन वह भी अधूरा रह गया. नतीजा यह है कि आज सूरजपुर जिले के लोग भी इस स्थान के बारे मे नही जानते हैं.

21 जून को दिन होता है बड़ा

स्थानीय शिक्षक दिनेश साहू बताते है कि 21 जून को दिन बड़ा होता है. ऐसे में इसी दिन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस भी मनाया जाता है, जिससे भैसामुंडा स्थल की अहमियत और बढ़ जाती है. यहां छोटे बच्चों मे भी इस स्थान को लेकर बेहद उत्सुकता है. बच्चे कर्क रेखा और भारतीय मानक समय रेखा को पुस्तकों में तो पढ रहे है, लेकिन उसी स्थान के पास रहकर उस स्थान को नही देख सके है. छात्र अपनी भूगोल की जिज्ञासा को दूर करने के लिए बड़ा होकर खुद ही उस स्थान पर जाकर सदियों से चली आ रही भूगोल के काल्पनिक रेखा और भारतीय मानक समय रेखा के ज्ञान को समझना चाहते है.

केवल पुस्तकों तक सीमित जगह

कर्क रेखा और भारतीय मानक समय रेखा के क्रास प्वाइंट वाले स्थान को पर्यटन के लिए विकसीत करने की पहल इससे पहले भी हुई थी, लेकिन रख-रखाव का अभाव के कारण आज यहां टुटे-फुटे निशान ही बचे है. ऐसे मे प्रचार-प्रसार और जानकारी के अभाव मे यह जंगल केवल पुस्तकों में ही सीमित हो चुकी है. अब प्रशासनिक अधिकारी फिर से इस स्थान के विकास के लिए पहल करने की बात करते नजर आ रहे है.

तत्कालीन कलेक्टर ने की थी विकसित करने की कोशिश

सूरजपुर के एसडीएम रवि सिंह ने बताया की कुछ वर्षों पहले तत्कालीन कलेक्टर दीपक सोनी के द्वारा भैसामुंडा को पर्यटन के रुप में विकसित करने की कोशिश की गई थी, जिससे काल्पनिक रेखा और भारतीय मानक समय रेखा की जानकारी के लिए लोग स्पॉट तक पहुंच सके. ऐसे में प्रशासन के द्वारा फिर से पहल कर इस स्थल को विकसित किया जाएगा. बहरहाल भूगोल कि जिज्ञासा को पूरा करने के भारत के एकमात्र स्थान को लेकर प्रशासन आने वाले दिनों में क्या पहल करेगा यह तो देखने वाली बात होगी.

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Author: Jagran Times

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