Rajasthan Chunav 2023: इस वजह से कट जाएंगे 75 विधायकों के टिकट, मच सकता है सियासी भूचाल


हाइलाइट्स

कांग्रेस के कुल 106 विधायकों में से 75 विधायकों और 26 मंत्रियों की उम्र 50 से ज्यादा
राजस्थान में कांग्रेस विधायकों की औसत उम्र 57.70 और मंत्रियों की तो 60.66 साल
गहलोत मंत्रिमंडल में हैं 70 साल से ज्यादा के 9 और 60 साल से ज्यादा के सात मंत्री

(एच.मलिक)
जयपुर. राजस्थान के मिशन-2023 (Mission-2023) में पचास से कम उम्र के युवाओं के ज्यादा मौके देने के कांग्रेस के ऐलान के साथ ही यह लगभग तय है कि कई वरिष्ठ विधायकों (Senior MLA) के टिकट अगले विधानसभा चुनाव में कटेंगे.  गहलोत सरकार में कांग्रेस (Congress) के विधायकों की जहां औसत उम्र 57.70 साल है, वहीं 106 में से 75 विधायकों और 26 मंत्रियों (Ministers) की उम्र भी 50 से ज्यादा है. ऐसे में युवाओं को तरजीह (Opportunities to Youth) मिलने पर आधे से ज्यादा मौजूदा विधायकों पर टिकट कटने की तलवार लटक गई है.

हालांकि कांग्रेस द्वारा बाहर की एजेंसी से कराए गए सर्वे में भी पार्टी के कई विधायकों की रिपोर्ट सही नहीं आई थी. प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने करीब दो माह पहले ही वन टू वन मीटिंग में ऐसे विधायकों को अलर्ट कर दिया था कि या तो वे अपनी रिपोर्ट सुधार लें, अन्यथा इस बार टिकट कटाने का मन बना लें.

फिर छिड़ी युवा और उम्रदराज नेताओं की बहस
राहुल गांधी की मौजूदगी में कांग्रेस ने पिछले साल उदयपुर के चिंतन शिविर में संकल्प लिया था कि पार्टी में युवाओं को ज्यादा से ज्यादा मौके दिए जाएंगे. सत्ता और संगठन दोनों में ही 50 साल से कम उम्र के 50 प्रतिशत लोग होंगे. राहुल के बाद प्रभारी रंधावा और अब सीएम के उसी लाइन पर चलने से कांग्रेस में एक बार फिर युवा और उम्रदराज नेताओं की बहस छिड़ गई है. वह भी उस दौर में जब युवा और अनुभवी नेताओं के बीच प्रदेश में आपसी खींचतान चरम पर है. एक ओर युवा तुर्क सचिन पायलट का खेमा ताल ठोंक रहा है, तो दूसरी ओर सबसे अनुभवी सीएम गहलोत के समर्थक हैं. कई वरिष्ठ विधायक अगला चुनाव लड़ना चाहते हैं.

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विधायकों की औसत आयु 57.70, मंत्रियों की 60 पार
प्रदेश में गहलोत सरकार की बात करें तो कुल 106 विधायकों में से 30 मंत्री और तीन महिलाएं मंत्री हैं. इन मंत्रियों में से 26 ऐसे हैं, जिनकी उम्र 50 या उससे अधिक है और पचास से कम आयु वाले सिर्फ अशोक चांदना, भंवर सिंह भाटी, टीकाराम जूली और सालेह मोहम्मद हैं. कुल कांग्रेस विधायकों में से 75 विधायक ऐसे हैं, जिनकी उम्र 50 साल या उससे अधिक है. कांग्रेस विधायकों की औसत उम्र 57.70 वर्ष है. वहीं मंत्रिमंडल में तो यह और भी ज्यादा है. कांग्रेस के मंत्रिमंडल की औसत उम्र 60.66 वर्ष है.

युवा विधायकों के एवरेज में पायलट का पलड़ा भारी
कांग्रेस के सिर्फ 31 विधायक ही ऐसे हैं जिनकी उम्र 50 साल से कम है. गुटबाजी में फंसी कांग्रेस के धड़ों का उम्र के हिसाब से आंकलन करें तो सचिन पायलट के खेमे में या उनका समर्थक करते दिखे विधायकों में युवा ज्यादा हैं. 30 से 50 की उम्र के विधायकों की बात करें तो इनमें कई ऐसे विधायक हैं जो सचिन खेमे से हैं. इनमें मुकेश भाकर, रामनिवास गावड़िया, दिव्या मदेरणा, इंद्रा मीणा, वेदप्रकाश सोलंकी आदि शामिल हैं. दूसरी ओर गहलोत गुट के ज्यादातर विधायक उम्रदराज हैं. इनमें 25 सितंबर को हुई बगावत में अहम रोल अदा और नोटिस पाने वाले शांति धारीवाल और महेश जोशी भी शामिल हैं.

कांग्रेस के 31 विधायक हैं 30 से 50 साल के बीच
कांग्रेस के 21 विधायक ऐसे भी हैं जिनकी आयु 40 से 50 साल के बीच है. इनमें पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट भी शामिल हैं. इसके अलावा वाजिब अली, संदीप यादव, प्रशांत बैरवा, पानाचंद मेघवाल, निर्मला सहारिया, मनोज मेघवाल, मंजू मेघवाल, मनीषा पंवार, महेंद्र सिंह विश्नोई, इंद्राज गुर्जर, गिर्राज सिंह मलिंगा, राजकुमार शर्मा, कृष्णा पूनिया, चेतन डूडी आदि शामिल हैं. कांग्रेस में सबसे कम 30 से 40 साल के सिर्फ 10 विधायक हैं. करीब 32 साल परबतसर विधायक रामनिवास गावड़िया सबसे युवा हैं. उन्हीं के साथी लाडनूं विधायक मुकेश भाकर की उम्र 34 साल है. महिला विधायकों में इंद्रा मीणा और ओसियां विधायक दिव्या मदेरणा भी इसी कैटेगरी में हैं.

50 पार विधायकों में डोटासरा, चौधरी भी शामिल
कांग्रेस में सबसे ज्यादा 30 विधायकों की उम्र 50 से 60 के बीच है. इनमें कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और पंजाब के प्रभारी हरीश चौधरी भी शामिल हैं. इसके अलावा इस लिस्ट में वीरेंद्र सिंह, सुदर्शन सिंह रावत, सोफिया जुबैर, रोहित बोहरा, रीटा चौधरी, रफीक खान, पदमराम मेघवाल, मीना कंवर, लखन सिंह, कृष्ण राम विश्नोई के भी नाम हैं. 50 प्लस वाले विधायकों में खिलाड़ीलाल बैरवा, जोगिंदर अवाना, हाकम अली खान, अनिल शर्मा, अशोक बैरवा, अमीन कागजी, अमर सिंह जाटव, महेंद्र चौधरी के नाम भी हैं.

सीनियर भले ही सीट न छोड़ें, युवा दावेदारी जताएं-सीएम
इस बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने युवा कांग्रेस के नेताओं को जो संदेश दिया है, वह एक तरह से प्रदेश प्रभारी के बयान की ही अगली कड़ी है. गहलोत ने कहा है कि सीनियर नेता भले ही अपनी सीट न छोड़ें, लेकिन युवा पूरे जोर-शोर से अपनी दावेदारी जताएं. इसका उन्हें फायदा मिलेगा, क्योंकि पार्टी ने 50 से कम आयु के युवाओं को ज्यादा मौके देने का मन बनाया है. सीएम से पहले प्रदेश प्रभारी रंधावा कह चुके हैं कि बड़ी उम्र वाले लोगों को खुद ही कुर्सी का मोह त्याग देना चाहिए. इसमें कहने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए. कांग्रेस ऐसी पार्टी है, जो युवाओं को मौका देती है.

युवाओं के आगे आने से सीएम को कोई खतरा नहीं
विधानसभा चुनाव के लिए युवाओं को आगे बढ़ाना दरअसल सीएम गहलोत की रणनीतिक पहल भी है. उनके द्वारा प्रस्तावित युवा विधायकों के जीतकर आने और पार्टी को बहुमत मिलने से उनके फिर सीएम बनने के अवसर ज्यादा होंगे. क्योंकि उनके मुकाबले कद्दावर नेता मैदान में नहीं होंगे और सीएम के लिए कांग्रेस में कोई आयु सीमा तय नहीं है. अभी कांग्रेस की चार राज्यों में सरकार है. सभी जगह उम्रदराज सीएम हैं. हाल ही में जीते कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया 75 साल, गहलोत 71 साल, छत्तीसगढ़ सीएम बघेल 61 और हिमाचल के सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू 59 साल के हैं.

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Author: Jagran Times

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