
प्रदीप कश्यप/सतना: जिले में शहर के अंदर नगर निगम सीमा क्षेत्र के अंतर्गत घनी आबादी के बीच लकड़ी के टाल अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं. लकड़ी टाल संचालकों ने ना तो कोई अग्नि सुरक्षा के मापदंड पूरे किए और ना ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं. शहर भर में ऐसे दर्जनभर से अधिक लकड़ी के टाल संचालित हो रहे हैं. कुछ पेट्रोल पंप के बगल में, तो कुछ बड़े होटल के बगल में खुले आसमान के नीचे संचालित हो रहे हैं. अगर ऐसे में कोई अग्नि दुर्घटना होती है तो उस पर नियंत्रण पाना बमुश्किल हो जाएगा. इन्हें हटाने के लिए निगम प्रशासन के पसीने छूट जाते हैं. हाल ही में 21 अप्रैल 2023 को शहर के कृपालपुर में यशपाल अग्रवाल नामक व्यक्ति के लकड़ी की टाल में भीषण आगजनी की दुर्घटना हुई थी. जिसमें आग बुझाने के लिए दमकल विभाग को 2 दिन लग गए थे और करीब 50 हजार लीटर से अधिक पानी नष्ट हुआ था, लेकिन उसके बावजूद भी निगम प्रशासन सचेत नहीं हुआ है.
वहीं इस बारे में निगम कमिश्नर राजेश शाही का कहना है कि यह बहुत बड़ा फैक्ट है कि शहर के अंदर घनी आबादी के बीच लकड़ी के टाल संचालित हो रहे हैं. जो शासन के नियम है वह यह है कि इस तरह के प्रतिष्ठान शहर के अंदर घनी आबादी के बीच नहीं होना चाहिए. फायर सुरक्षा के मापदंड पूरे होने चाहिए, लेकिन यह बात भी सही है कि सभी टाल संचालकों द्वारा फायर सेफ्टी के नॉर्म्स को पूरा नहीं किया गया है.
फायर सुरक्षा के मापदंड पूरे होने चाहिए
उन्होंने कहा कि हमने इसके लिए फायर सेफ्टी अधिकारी को भी निर्देशित किया है, जोकि इन प्रतिष्ठानों की विजिट कर फायर सुरक्षा के मापदंड चेक कर रहे हैं. इन लकड़ी के टालों को शहर से बाहर शिफ्ट करने के लिए भूमि की उपलब्धता का भी प्रयास जारी है. जब तक ऐसे प्रतिष्ठानों को सेफ्टी नॉर्म्स पूरे ना हो तो वह लकड़ी की टाल ना संचालित करें. इसके लिए हमने फायर अफसर को निर्देशित किया है.









