
नरेश पारीक/ चूरू. अक्सर अजीबोगरीब चौक और चौराहों की चर्चाएं होती है और उनसे जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से और कहानियां भी होती है. ऐसी ही एक शहर की पुरानी सड़क के पास गली है, जिसे लोग कबूतरों की गली के नाम से आज जानते और पहचानते हैं. जहां आज कबूतर डेरा डाले हुए हैं.
आस-पास के लोग बताते हैं वर्षो पहले शहर के एक सेठ मनीराम जी ने शहर के लोगो के मनोरंजन और खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पुरानी सड़क पर मनोरंजन क्लब बनाया था. सेठ जी को पशु, पक्षियों से अत्यधिक प्रेम था. ऐसे में मनोरंजन क्लब में एक खुला स्थान भी रखा. जहां बड़ी संख्या में बेजुबान पक्षी दाना,पानी चुगने आते थे. ऐसे में सेठ जी ने मनोरंजन क्लब की एक दीवार को कबूतरों को ध्यान में रखते हुए कुछ इस तरह बनवाया, जिसमे इन बेजुबानों को रहने का स्थान मिल सके. जहां आज इस क्लब की पूरी दीवार पर छोटे-छोटे इन कबूतरों के लिए आशियानें बनाएं गए हैं. वहां बड़ी संख्या में अब कबूतर निवास करते हैं. जिसके बाद इस गली का नाम लोगो ने कबूतर वाली गली रख दिया और आज यही कबूतर इस गली की अब शान है.
आंधी-बारिश में नहीं होती परेशानी
आंधी,बारिश और तूफान इन बेजुबानों के लिए किसी विपदा से कम नहीं होते. तूफानी बारिश में ना जाने कितने ही बेजुबानों पर कहर टूटता है. ऐसे में कबूतरों के लिए ये आशियानें इन्हें आंधी, बारिश और तूफान में सुरक्षित रखते हैं. इसके साथ ही स्ट्रीट डॉग और आम-लोग भी इन आशियानें तक नही पहुंच पाते. क्योंकि आम सड़क से ये आशियानें 25 से 30 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. वर्तमान में मनोरंजन क्लब प्रसाशन के हवाले है, जहां आज भी गींदड़ नृत्य और अन्य खेल गतिविधियों का आयोजन होता है.
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FIRST PUBLISHED : June 16, 2023, 16:44 IST






