
कृष्ण कुमार/ नागौर. राजस्थान का नागौर ऐसा जिला है जिसमें हर प्रकार की मृदा यहां अलग अलग हिस्सों में पाई जाती है. लेकिन नागौर के खींवसर तहसील में रेतीली मृदा पाई जाती है. वहां पर आम की खेती करना संभव है. ऐसा इसलिए बता रहे कि खींवसर के रामेश्वर सैनी के द्वारा आम के पौधे लगा कर एक प्रयोग किया गया है. जिसमें वे सफल भी हो गए है. आगे वे इस मॉडल के जरिये किसानों को आम की खेती के तरीके के बारें में बताएंगे
रामेश्वर सैनी ने बताया कि मैं किसी काम के सिलसिले में पुष्कर गया तो वहां से मैंने अपने घर में और ऑफिस में पौधे लगाने के लिए रुका. वहां के नर्सरी मालिक से मैने पूछा अगर मैं खींवसर की भूमि पर आम के पौधे लगाऊ तो किस किस्म पौधे अच्छे रहेगें और कौनसी भूमि इनके लिए सही रहेगी. तब नर्सरी के मालिक ने मना कर दिया और कहा कि वहां पर आम नहीं हो सकते. इसके बाद मैंने जिद करके केसर किस्म के आम के पौधे में पुष्कर से लाकर खींवसर में लगा दिए ये दोनों आम के पौधे यहां पर सक्सेस हो गए.
रामेश्वर ने बताया कि आम को पौधे लगाने के बाद मैंने इनमें देसी खाद और नहर का पानी दिया और समय-समय पर पौधे की आवश्यकता के अनुसार देखभाल करता रहा. जिसका एक वर्ष बाद मुझे परिणाम मिला और खींवसर की भूमि पर यह मॉडल सक्सेस हो गया.
रामेश्वर सैनी ने बताया कि मैं खींवसर की भूमि पर आम की खेती करना चाहता था. लेकिन इसके लिए मैंने पहले आम के 2 पौधे खरीदे और यहां पर ट्राई किए तो यह पौधे मैंने मॉडल के तौर पर खरीदकर देखे तो यहां पर यह मॉडल सक्सेस रहा. अब खींवसर में बड़े स्तर पर आम की खेती की जाएगी. क्योंकि यह पौधे सक्सेस हुए है. तो बाकी पौधे भी सक्सेस हो जाएंगे वहीं अगर यह मॉडल पूर्ण रूप से सफल रहा तो किसानों की आय धन बढ़ाने के लिए किसानों को इस खेती के बारे में निःशुल्क परीक्षण दूंगा, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो जाए और कम भूमि पर भी ज्यादा मुनाफा कमाए.
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FIRST PUBLISHED : June 16, 2023, 15:31 IST






