पानी बचाने का संदेश देता है कोटा का ये जैन मंदिर, इसका प्राचीन कुआं आज तक है संरक्षित

शक्ति सिंह/ कोटा. कुआं हमारी प्राचीन सभ्यता व संस्कृति का हिस्सा अवश्य रहा है. लेकिन वर्तमान परिवेश में ये कुएं हमारी ना समझी के कारण कूड़ेदान बनते जा रहे हैं. समय से साथ व्यवस्था की मार कुओं पर पड़ने लगी. 1950-60 के बाद गांवों में स्थित कुओं की देखभाल धीरे-धीरे कम होने लगी और नतीजा अब कुओं का अस्तित्व मिटता जा रहा है. पिछले चार दशक पहले तक ग्रामीण इलाकों में कुएं पानी का मुख्य श्रोत हुआ करते थे, कुए का पानी पीने के साथ-साथ सिंचाई का मुख्य स्रोत था. लेकिन पर्यावरण में हो रहे अवांछित बदलाव के कारण भूजल का गिरता हुआ स्तर कुएं के अस्तित्व पर संकट का प्रमाण है.

नासियां जैन मंदिर में आज भी कुआं

हालांकि, अब गांवों में कई पुराने कुओं का पानी पूरी तरह से समाप्त हो चुका है, एवं कुछ कुओं का जल समाप्त होने के कगार पर है. बचे हुए कुओं की दशा भी वर्तमान समय में इस कदर खराब हो चुकी है. लेकिन, कई कई गांव और शहरों आज भी कुएं मौजूद हैं. जहां से पानी निकालकर पिया जाता है. कोटा के अंदर भी दादाबाड़ी इलाके में नसिया जी जैन मंदिर के अंदर भी एक प्राचीन कुआं है. जिसका पानी आज भी पिया जाता है. इस कुएं का पानी खत्म ना हो इसके लिए इस मंदिर के अंदर एक खास वाटर प्लांट लगाया गया है, जिससे बारिश के पानी को कुएं के अंदर संग्रहित किया जाता है और इस पानी का उपयोग भगवान के अभिषेक और साधु संत महात्माओं के पीने के लिए दिया जाता है.

भगवान की अभिषेक इसी के पानी से होता है

नासियां जी जैन मंदिर के अध्यक्ष जम्बु कुमार जैन ने बताया कि मंदिर की एक छत पर बारिश के पानी को बचाने के लिए अच्छे से साफ करके टाइलें लगाई गई है और एक पूरा प्लांट बनाया गया है. बारिश का पानी जब भी उस छत पर आता है. तो वाटर प्लांट में होता हुआ पाइप के जरिए इस कुएं के अंदर इकट्ठा हो जाता है. मंदिर में मौजूद भगवान की प्रतिमा का प्रतिदिन अभिषेक अमृत कुंड के पानी से ही किया जाता है और बचा हुआ पानी वापस इसी में ही डाल दिया जाता है.

पेट की बीमारी हो जाती हैं ठीक

वहीं मंदिर में आने वाले जैन साधु संत मुनि भी कुएं का पानी ही उपयोग करते हैं. साधु—संत भी बाहर का नल का पानी नहीं पीते इसलिए उन्हें भी अमृत कुंड का पानी दिया जाता है. इस पानी का उपयोग बाहर के कामों के लिए नहीं लिया जाता. ऐसी मान्यता है कि जिस किसी महिला पुरुष को पेट से संबंधित किसी भी प्रकार की कोई बीमारी है तो अमृत कुंड का पानी कुछ दिन पीने से पेट संबंधित बीमारियां खत्म हो जाती है.

नसिया जी जैन मंदिर के अध्यक्ष जम्बु कुमार जैन ने बताया कि मंदिर की एक छत पर बारिश के पानी को बचाने के लिए अच्छे से साफ करके टाइलें लगाई गई है. और एक पूरा प्लांट बनाया गया है. बारिश का पानी जब भी उस छत पर आता है. तो वाटर प्लांट में होता हुआ पाइप के जरिए इस कुएं अमृत कुंड के अंदर इकट्ठा हो जाता है. और इसका उपयोग मंदिर में मौजूद भगवान का प्रतिदिन अभिषेक अमृत कुंड के पानी से ही किया जाता है, और बचा हुआ पानी वापस इसी में ही डाल दिया जाता है, और मंदिर में आने वाले जैन साधु संत मुनियों के उपयोग के लिए किया जाता है साधु संत भी बाहर का नल का पानी नहीं पीते इसलिए उन्हें भी अमृत कुंड का पानी दिया जाता है. इस पानी का उपयोग बाहर के कामों के लिए नहीं लिया जाता ऐसी मान्यता है कि जिस किसी महिला पुरुष को पेट से संबंधित किसी भी प्रकार की कोई बीमारी है. तो अमृत कुंड का पानी कुछ दिन पीने से पेट संबंधित बीमारियां खत्म हो जाती है.

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Author: Jagran Times

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