Pakistan News: पाकिस्तान और ईरान आतंकी घटनाओं को लेकर तालिबान से नाराज, अपने देश में अफगान नागरिकों पर लिए कड़े एक्शन

नई दिल्ली: पाकिस्तान और ईरान आतंकवादी घटनाओं को लेकर तालिबान से नाराज हैं. दोनों देशों ने अपने यहां मौजूद अफगान नागरिकों पर लिए कड़े एक्शन लेने शुरू कर दिए हैं. पाकिस्तान ने अपने देश में मौजूद अफगानी नागरिकों को बड़े पैमाने पर गिरफ्तार कर उन्हें डिपोर्ट करने का फैसला किया है. वहीं दूसरी तरफ ईरान सरकार ने बाकायदा नोटिस निकालकर अफगानी नागरिकों को काम देने से मना किया है और ऐसा न करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को कहा है.

आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान को अफगनिस्तान में सत्तारूढ़ तालिबान से मिल रहे लगातार सपोर्ट के कारण पाकिस्तान खासा नाराज है. उसने अपने देश में अवैध रूप से मौजूद अफगान नागरिकों की बड़े पैमाने पर गिरफ्तारी शुरू कर दी है. अफगान नागरिकों की गिरफ्तारी को लेकर पाकिस्तान और अफगानिस्तानी अधिकारियों के बीच लंबी बैठकों का दौर भी चला, लेकिन लगातार बढ़ते आतंकवादी हमलों को देखते हुए पाकिस्तान ने तालिबानी सरकार की तमाम अपील ठुकरा दी हैं. पाकिस्तान में अफगानी नागरिकों को बड़े पैमाने पर गिरफ्तार किया जा रहा है.

अफगान प्रतिनिधिमंडल ने बैठक की
इस्लामाबाद, रावलपिंडी और आसपास के इलाकों में अभी भी अफगान शरणार्थियों की गिरफ्तारी का सिलसिला जारी है. अफगान दूतावास के एक प्रतिनिधिमंडल ने इस्लामाबाद के सुरक्षा अधिकारियों के साथ एक बार फिर इस समस्या पर गहन चर्चा की. पुलिस अधिकारियों के साथ आज हुई बैठक में खुलासा हुआ कि अब तक करीब 250 अफगानों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

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पाक ने कहा- अफगान नागरिकों के पास निवास परमिट नहीं
पाकिस्तान प्रशासन का कहना है कि इन अफगान नागरिकों को निवास परमिट ना होने के चलते हिरासत में लिया गया है. उन्हें काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (सीटीडी) सहित कई अन्य एजेंसियों द्वारा गिरफ्तार किया गया है. पाकिस्तानी प्रशासन ने तालिबान पर दबाव बनाते हुए अपने इन तमाम नागरिकों को वापस अफगानिस्तान डिपोर्ट करने का फैसला किया है. पाकिस्तानी प्रशासन का कहना है कि अफगानिस्तान अपनी कही हुई बातों पर अमल नहीं कर रहा है लिहाजा वह कड़े कदम उठाने के लिए मजबूर है.

ईरान ने कहा- अफगान प्रवासी श्रमिकों को रोजगार ना दें
दूसरी तरफ इरान प्रशासन ने भी उनके यहां हो रही आतंकी घटनाओं के मद्देनजर अफगानी नागरिकों के खिलाफ कड़े एक्शन लिए हैं. ईरानी प्रशासन ने बाकायदा नोटिस निकाल कर तमाम दुकानों तथा अन्य संस्थानों को चेतावनी दी है कि वे अफगान प्रवासी श्रमिकों को रोजगार ना दें और यदि ऐसा कोई करता पाया गया तो उनके दुकानों-संस्थानों को सील कर दिया जाएगा और भारी जुर्माना लगाया जाएगा. ईरान का मानना है कि अफगानी नागरिकों की बड़े पैमाने पर आतंकी घटनाओं में साठगांठ पाई गई है, लिहाजा ये कदम उठाए जा रहे हैं.

तालिबानी प्रवक्ता ने आलोचना की
अफगानिस्तान सरकार के तालिबानी प्रवक्ता जबीहुल्लाह ने अफगान शरणार्थियों पर लिए जा रहे कड़े एक्शन को लेकर ईरान और पाकिस्तान की आलोचना की और कहा कि उनके द्वारा किया जा रहा है कार्य अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के खिलाफ है. जबीहुल्लाह ने साथ ही कहा कि यह इस्लामिक भाईचारे की भावना के भी खिलाफ है. तालिबानी प्रशासन ने कहा कि हम पाकिस्तान सरकार से अनुरोध करते हैं कि वह अफगान शरणार्थियों को जबरन गिरफ्तार करने के सिलसिले को रोके, जिसका दोनों देशों के संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है.

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लाखों अफगानी शरणार्थी हैं दोनों देशों में
ईरान और पाकिस्तान में सबसे ज्यादा अफगानी शरणार्थी के तौर पर रहते हैं. इनकी संख्या ईरान में 3.4 मिलियन (34 लाख) और पाकिस्तान में 1.7 (17 लाख) मिलियन बताई जाती है. तालिबानी प्रशासन का मानना है कि ईरान और पाकिस्तान अपने स्वार्थ को लेकर अफगान नागरिकों के साथ भेदभाव कर रहे हैं और तालिबान पर दबाव बना रहे हैं. ध्यान रहे कि पाकिस्तान चाहता है कि तालिबान तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान पर पूरी तरह से रोक लगा दे. जबकि ईरान से हेलमंड नदी के पानी विवाद को लेकर तालिबान प्रशासन के संबंध कड़वे हुए हैं.

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Author: Jagran Times

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