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अंग्रेज अफसरो के ठहरने के लिए खल्लारी, बहीगांव, माडमसिल्ली, दुगली, बनरीद और धमतरी में रेस्टहाउस बनाए गए थे जो आज भी अच्छी हालत मे है और इनका आज भी इस्तेमाल होता है. इसके साथ ही लकड़ियां चीरने के लिए दुगली और सांकरा में स्टीम सा मशीने लगाई गई. बेहतरीन क्वालिटी और मजबूती के कारण धमतरी के साल और सागौन की बड़ी डिमांड थी. अंग्रेजो के द्वारा उस दौर का आधुनिकतम प्रोडक्शन सिस्टम और सप्लाई नेटवर्क के कारण धमतरी एशिया का सबसे बड़ा फारेस्ट प्रोडक्शन सेंटर बन गया. यहां की लकड़ियां बेच कर अंग्रेज खूब पैसा कमा रहे थे और अपना खजाना भर रहे थे.
Author: Jagran Times
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