
पीयूष पाठक/ अलवर. जिले के किसानों को जैविक खेती करने में अच्छा रुझान है. लेकिन सिर्फ मोटे अनाज वाले किसानों को अभी यह खेती रास आ रही है. बात अगर जैविक सब्जी उगाने वाले किसानों की जाए तो इनका रुझान अभी परंपरागत सब्जियां उगाने में ही है. उद्यान विभाग के अनुसार जिले में अभी करीब 25 हजार हेक्टेयर पर ही जैविक सब्जी उगाई जा रही है. उद्यान विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसान मोटे अनाज की फसल का भंडारण कर सकता है. लेकिन सब्जी का भंडारण नहीं हो सकता और मंडी में भाव सही नहीं मिलने से किसान जैविक सब्जी उगाने में रुचि कम ले रहे हैं. लेकिन आने वाले समय में किसान इसको अपनाएंगे.
ऑर्गेनिक सब्जियों के नहीं मिल पाते दाम
उद्यान विभाग के सहायक निदेशक लीलाराम जाट का कहना है कि जैविक खेती में जिले का काश्तकार काफी रुचि ले रहा है. उद्यान विभाग की तरफ से भी लगातार कोशिशें की जा रही है कि किसानों को इसके बारे में अच्छे से बताया जाए. जिससे किसान इसमें रुझान बढ़ाएं. कृषि विभाग की तरफ से जिले में कई जगह डेमोंसट्रेशन भी लगाए गए. हालांकि जैविक सब्जी की खेती में काश्तकार पिछड़ रहा है. इसका मुख्य कारण है कि इसका उत्पादन बिना रासायनिक के नहीं हो पा रहा है. जिले में जैविक सब्जी की बात की जाए तो करीब 25 हजार हेक्टेयर में यह उत्पादित होती है. लेकिन किसान सिर्फ अपने यूज़ के लिए ही अभी इसे उत्पादन कर रहा है. इसका मेन कारण यह है कि किसानों को इसका बाजार अलग नहीं मिलने से इसमें किसानों को समस्या आ रही है. किसानों को जैविक और रासायनिक सब्जी का एक ही भाव मिल रहा है. जैविक खेती में अभी उत्पादन कम मिल रहा है. जिसके कारण काश्तकार इसमें कम रुचि ले रहा है.
उत्पादन कम होने से भी नहीं रुझान
लीलाराम जाट ने बताया कि मोटे अनाज उगाने वाले काश्तकार इसमें अच्छी रूचि ले रहे हैं. जिले में कई काश्तकार ऐसे भी हैं, जो 25 से 30 हेक्टेयर में मोटे अनाज का उत्पादन कर रहे हैं. जिसे जैविक के रूप में परिवर्तित कर दिया. शुरुआती दौर में उत्पादन जैविक खेती में कम होता है. लेकिन करीब 3 से 4 साल बाद उत्पादन अच्छा होने लगता है. जिससे किसानों को फायदा होता है. लेकिन सब्जी के क्षेत्र में उत्पादन भी कम हो रहा है और किसानों को भाव भी नहीं मिल पा रहा है. जिसके कारण किसान अभी इसमें रुझान होते हुए भी इससे दूरी बनाए हुए हैं.
अगले कुछ सालोंं में बढ़ेगा रकबा
लीलाराम जाट का कहना है कि आगे आने वाले करीब 5 से 6 सालों में काश्तकार इसे अपनाएंगे और अच्छा मुनाफा कमाएंगे. जिले के कई काश्तकार उद्यान विभाग व कृषि विभाग के फील्ड ऑफिसर से भी कांटेक्ट करते हैं और उनका रजिस्ट्रेशन भी हो रहा है. लेकिन जिले के काश्तकारजैविक में परिवर्तन करने के बाद सब्जी ना उगाकर मोटे अनाज पर अभी जोर दे रहे हैं. अगर जैविक सब्जी उगाने वाले किसानों को अलग से अपनी मंडी मिले तो उन्हें अच्छा भाव मिल सकेगा और किसान इसमें रुझान भी लेंगे. अगले कुछ सालों में इसका क्षेत्रफल में भी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी. उद्यान विभाग की तरफ से हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं.
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FIRST PUBLISHED : June 16, 2023, 12:03 IST






