
हाइलाइट्स
O2O सिस्टम उन कई तकनीकों में से एक है जिनका आर्टिमिस II अभियान में परीक्षण होगा.
यह नई लेजर तकनीक परंपरागत रेडिया तरंगों की संचार तकनीक से बहुत ही उन्नत है.
इसके जरिए आंकड़ों के आदान प्रदान की दर और मात्रा दोनों बहुत बढ़ जाएगी.
नासा के आर्टिमिस अभियान के दूसरे चरण की तैयारी चल रही है. इसके लिए नासा के केनेडी स्पेस सेंटर में ओरियन अंतरिक्ष यान से जुड़ने के लिए उसका लेसर संचार तंत्र पहुंच गया है. ओरियॉन अंतरिक्ष यान के जरिए ही आर्टिमिस 2 अभियान का क्रू चंद्रमा के चक्कर लगाएगा. यह पहली बार होगा जब अपोलो अभियानों के बाद कोई क्रू चंद्रमा के नजदीक जाएगा. इस अभियान के अगले चरण में पृथ्वी से एक महिला और एक पुरुष चंद्रमा पर जाकर वहां कई दिनों तक रहेंगे. दोनों चरणों की सफलता में संचार तंत्र की बहुत अहमियत है जिसकी जिम्मेदारी ओरियन आर्टिमिस II ऑप्टिकल कम्यूनिकेशन सिस्टम पर होगी.
आर्टिमिस अभियान
नासा के आर्टिमिस अभियान का पहला चरण 16 नवंबर 2022 में प्रक्षेपित हुआ था जिसमें बिना क्रू के उड़ान का परीक्षण किया गया था. जिसमे पहली बार ओरियन यान और नासा का विकसित किया हुआ स्पेस लॉन्च सिस्टम रॉकेट का भी पहली बार परीक्षण हुआ था. अब अगले चरण यानि दूसरे चरण में ओरियन यान की क्रू उड़ान की जरूरतों का परीक्षण होगा जिससे चंद्रमा के लिए भविष्य के अभियानों के लिए मंच तैयार होगा.
कई उन्नत तकनीकों का परीक्षण
अभियान के इसी चरण में ही कई नई उन्नत तकनीकों का परीक्षण होगा जिसमें लेजर संचार क्षमताएं भी होंगी. ओरियन लेजर कम्यूनिकेशन टर्मिनल को ओरियन आर्टिमिल ऑप्टिकल कम्यूनिकेशन सिस्टम या ओ2ओ कहते है. इसके जरिए यान और पृथ्वी के बीच के संचार सुचारू रूप हो यह सुनिश्चित किया जा सकेगा.
ज्यादा मिलेगी स्पीड
ओ2ओ जैसे संचार तंत्र अभियानों को ज्यादा आंकड़ों की स्थानातंरण दर दे सकते हैं. यानि वे एक ही बार के संचारण में ज्यादा सूचना का आदान प्रदान किया जा सकेगा. जबकि परंपरागत रेडिया तंरगों के तंत्र में यह दर कम होती है और आज के अधिकांश नासा अभियानों में इसी तत्र का उपयोग किया जाता है. समझा जा सकता है कि ज्यादा आंकड़ों का मिलने का अर्थ ज्यादा खोजें होगा.
क्या-क्या काम करेगा
ओ2ओ के प्रोजेक्ट मैनेजर स्टीव होरोविट्ज का कहना है कि ओ2ओ संचार तंत्र में डेटा की गति 260 मेगाबाइट्स प्रति सेकेंड की होगी और यह चंद्रमा से ही 4 हजार हाई डेफिनेशन वीडियो भेजने में सक्षम होगा. वीडियो और तस्वीरों के अलावा ओ2ओ कई प्रक्रियाएं, अन्य तस्वरें, उड़ान योजनाओं का आदान प्रदान करेगा. ओरियन और पृथ्वी के मिशन कंट्रोल के बीच की कड़ी का काम करेगा.
जमीनी स्टेशनों के लिए
आंकड़े जमा करने के बाद ओ2ओ लेजर संकेतों के जरिए दो ग्राउड स्टेशनो में से एक को जानकारी भेजेगा. इनमें से एक स्टेशन न्यूमैक्सिको के लास क्रूसेस में है और दूसरा कैलिफोर्निया के टेबल माउंटेन हैं. दोनों जगहों का चयन कम से कम बादल होने की जगह के तौर पर किया गया है क्योंकि ओ2ओ के जरिए ओरियन से भेजी गई तस्वीरों और वीडियो की गुणवत्ता कुछ हदतक जमीनी स्टेशनों के बदालों की उपस्थिति पर निर्भर करेगा.
किसने तैयार किया ये तंत्र
ओ2ओ लेजर टर्मिनल स्पेस कम्यूनिकेशनस एंड नेवीगेशन (SCaN) के ऑप्टिकल इन्फ्यूजन प्रयासों का हिस्सा है जो बहुल अभियानों में लेजर संचार का प्रदर्शन करेगा. इसे नासा के गोडार्डस्पेस फ्लाइट सेंटर और मसाचुसैट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी लिंकन लैबोरेटरी के इंजीनियरों ने मिलकर तैयार किया है.
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Tags: Earth, Moon, Nasa, Research
FIRST PUBLISHED : June 16, 2023, 10:12 IST






