मेढ़ विधि से पूर्णिया के किसान ने 5 कट्ठा में उपजाया 400 किलो गेंहू, जानिए कैसे तैयार करें खेत और बीज 

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विक्रम कुमार झा/पूर्णिया. रबी फसल लगाने में अभी समय है. पर आज आपको ऐसी विधि के बारे में बताई जा रही है जिसको अपनाने से पैदावार अच्छी होगी. इसको मेढ़ विधि कहते हैं. इस विधि से गेहूं की खेती की अच्छी उपज होगी. इसके साथ समय, पैसा और मजदूरी का भी चक्कर नहीं होगा.

इस पर पर विषेश जानकारी देते हुए पूर्णिया के किसान शशिभूषण सिंह ने मेढ़ विधि से गेहूं की खेती कर अच्छी उपज और अच्छी पैदावार किया. उन्होंने कहा कि इस तरह कोई भी किसान गेहूं की खेती करता है तो यह खेती से समय और पैसे सहित अन्य खर्चों से राहत मिलेगी. कम लागत में ज्यादा और अच्छी पैदावार हो सकती है.

जानें इस विधि को, ऐसे तैयार होता है बीज
किसान शशि भूषण सिंह ने न्यूज़18 लोकल से बात करते हुए कहा वह अपने तरीके से गेहूं की खेती की. 5 कट्ठे की खेती में उन्होंने 4 क्विंटल 15 किलो गेहूं की अच्छी उपज की. जहां तक देखा जाय तो पूर्णिया के क्षेत्र के किसानों की गेहूं की उपज अच्छी नहीं होने से परेशान होते हैं. अगर इस तरह खेती करें तो उपज के साथ लाभ होगा.उन्होंने कहा जैविक और प्राकृतिक तरह से खेती कर बीज को तैयार किया.

आपके शहर से (पूर्णिया)

5 कट्ठे खेतों में बुवाई करने के लिए उन्होंने 2KG गेहूं का बीज लिया. जिस बीज को उन्होंने अपने विधि से उपचार कर 2kg गेहूं के बीज मैं आधा किलो गुड़ और गोमूत्र और वर्मी कंपोस्ट को मिलाकर बीज को उसमें डालकर धोकर साफ कर लिया. उस बीज को सुखने के लिए कहीं पर बाहर छोड़ दिया गया. उसके बाद पानी से छानकर निकालने के बाद उन्होंने जूट के बोरे पर गेहूं के बीज को सूखने के लिए ठंडे जगह में छोड़ दिया.

18 इंच की बनाते हैं क्यारी
जब उसकी नमी खत्म हो गई तो ट्राइकोडर्मा पाउडर मिलाकर बीज को पुनः जूट के बोरे में बांधकर अंकुरित होने के लिए रखा. उन्होंने कहा कि उसके बाद 72 घंटे के बाद जब उस गेहूं के बीज को निकाला तो उसमें अंकुरित हो गया था. इस दौरान उन्होंने अपने खेत की भी तैयारी कर ली थी. उन्होंने उस गेहूं के बीज को अपने खेत में गोबर डालकर मेढ़ बनाकर 18 इंच ऊंची क्यारी बनाकर बीज को 8-8 इंच के दूरी पर दो-दो दाना बीज का डालकर कर रोपाई किया .

इतने दिनों बाद जरूर करें सिंचाई, होगा लाभ
रोपाई करने के बाद 12 से 13 दिन बाद हल्की सिंचाई किया. उन्होंने कहा कि आमतौर पर सिंचाई 22 दिन पर किया जाता है लेकिन उन्होंने 10 से 12 दिन पर सिंचाई किया. इसलिए क्योंकि वह पहले से अंकुरित हो चुका था. इसलिए उसे भोजन की जरूरत था इसलिए पानी समय पर दिया गया.

तेज आंधी और हवा में नहीं गिरेगा पौधा
उन्होंने कहा कि मेढ़ विधि पर लगाने से सबसे ज्यादा फायदा यह होता है कि पानी की बचत होगी. उन्होंने कहा कि जिस खेत में आपको घंटों लग जाते हैं, वही इस खेती करने में कम समय लगेगा. उन्होंने कहा कि मेढ़ पर लगाने से उसमें उन्होंने कहा कि मेढ़ विधि से अगर खेती करें गेहूं की तो आंधी, हवा होने पर भी गेहूं की फसलें बर्बाद नहीं होती है. ज्यादा होने के कारण वह मजबूती के साथ जमीन में पकड़ बनाए रखता है.

इस विधि से खेती करने पर होगा ज्यादा उपज और ज्यादा फायदा
उन्होंने कहा कि मेढ़ विधि से अगर कोई भी किसान गेहूं की खेती करते हैं तो उन्हें अपने खेतों में पानी की बचत होगी. मजदूरों की बचत होगी और समय का बचत होगा. कई अन्य चीजों की बचत हो जाएगी.

Tags: Bihar News in hindi, Purnia news

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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