
हाइलाइट्स
गुरु ग्रह पर रंगीन पट्टियां उसकी भूमध्य रेखा के समांतर बनी रहती हैं.
इनके रंगों में बदलाव का संबंध मैग्नेटिक फील्ड के बदलाव से है.
यह जानकारी नासा के जूनो यान के जुटे आंकड़ों से मिली है.
गुरु ग्रह की कई विशेषताएं वैज्ञानिकों के लिए रहस्य बनी हुई हैं. इनमें सबसे प्रमुख तौर पर विशाल लाल धब्बा है जो गैसीय वायुमंडल में लंबे समय से कायम है और उसका स्थायी हिस्सा लगता है. लेकिन इसके अलावा एक और रहस्य है जिसने वैज्ञानिकों को काफी समय से उलझाए रखा था और वह है इस विशाल गैसीय ग्रह पर रंगीन पट्टियां. इन पट्टियों की खास बात यह है कि ये समय समय पर हिलती रहती हैं और अपना रंग भी बदलती रहती हैं. ऐसा क्यों होता है वैज्ञानिक अब तक इसकी व्याख्या नहीं कर पा रहे थे. लेकिन अब नई खोज से वैज्ञानिकों को लगता है कि उन्होंने इस रहस्य को सुलझा लिया है.
गुरु की मैग्नेटिक फील्ड
यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स के वैज्ञानिकों के इस विश्वास के पीछे गुरु ग्रह के मैग्नेटिक फील्ड की नई जानकारी है जो शोधकर्ताओं ने नासा के जूनो यान के जरिए जुटाए गए आंकड़ों के अध्ययन से हासिल की गई है. अध्ययन में पाया गया है की गुरु ग्रह की पट्टियों में बदलाव का संबंध उसके मैग्नेटिक फील्ड के बदलाव के साथ मेल खाता है.
अक्षांशों पर पट्टियां
इस अध्ययन के सहलेखक क्रिस जोन्स ने एक बयान में बताया कि गुरु को टेलीस्कोप से देखने से पर उसकी भूमध्य रेखाओं के समांतर अक्षांशों पर पट्टियां देखने को मिलेंगी. यह पट्टियां गहरे और हलके रंग की होती हैं और ध्यान से देखने पर इनमें तैरते हुए बादल भी दिखाई देते हैं जो बहुत तेज पूर्वी और पश्चिमी हवाओं के साथ बहते हैं.
हवाओं का पलटकर बहना
भूमध्य रेखा के पास हवाएं पूर्व की ओर बहती हैं, लेकिन जैसे ही अक्षांशों में कुछ बदलाव होता है, चाहे उत्तर हो या दक्षिण, उनकी दिशा पलट कर पश्चिम की ओर हो जाती है. और उसके बाद थोड़ा और दूर जाने पर ये फिर से पूर्व की ओर बहने लगती है. पूर्व और पश्चिम की ओर बहने वाला हवाओं का यह एकांतर स्वरूप पृथ्वी के मौसम से से बहुत ही अलग है.
शुरु से ही रहस्य
हर चार पांच सालों में ग्रह पर हालात बदलते हैं और इन पट्टियों का रंग बदल सकता है. वैज्ञानिकों ने गुरु पर इनमें वैश्विक स्तर पर उतार चढ़ाव भी देखे हैं. लेकिन ऐसा क्यों होता है या ऐसा क्या है जिसकी वजह से ये पट्टियां रंग बदलती हैं और साथ अपनी गतिविधि या सक्रियता भी, यह वैज्ञानिकों के लिए शुरू से ही रहस्य ही था.
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Tags: Earth, Jupiter, Nasa, Research, Solar system
FIRST PUBLISHED : May 27, 2023, 09:49 IST









